ज्यादा सोना भी है मौत का बुलावा? स्टडी का खुलासा - सिर्फ कम ही नहीं, 9 घंटे से ज्यादा नींद भी घटा सकती है आपकी उम्र!
"अच्छी सेहत के लिए 7-8 घंटे की नींद बहुत जरूरी है।" - यह एक ऐसी सलाह है जो हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, और इसे फिटनेस का गोल्डन रूल भी माना जाता है। कम सोने के नुकसान तो हम सब जानते हैं - दिल की बीमारी, मोटापा, डायबिटीज, और न जाने क्या-क्या। इसलिए, हममें से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अगर हम ज्यादा सोएंगे, तो शायद और भी ज्यादा स्वस्थ रहेंगे। वीकेंड पर 9-10 घंटे की नींद लेना तो हम अपना 'हक' समझते हैं।
लेकिन, अब एक नई और बेहद चौंकाने वाली स्टडी ने नींद के बारे में हमारी इस सोच को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। यह स्टडी कहती है कि कम सोने की तरह ही, बहुत ज्यादा सोना भी आपकी उम्र कम कर सकता है और आपको जल्दी मौत की ओर धकेल सकता है!
क्या कहती है यह हैरान करने वाली स्टडी?
कई सालों तक लाखों लोगों पर की गई इस व्यापक स्टडी के जो नतीजे सामने आए हैं, वे बेहद गंभीर हैं।
- जल्दी मौत का खतरा: स्टडी में पाया गया कि जो लोग रात में 9 घंटे से ज्यादा की नींद लेते हैं, उनमें जल्दी मृत्यु (Premature Death) का खतरा, 7-8 घंटे सोने वालों की तुलना में 30% तक ज्यादा होता है।
- दिल की बीमारियों का हमला: इतना ही नहीं, 9 घंटे से ज्यादा सोने वालों में स्ट्रोक जैसी जानलेवा दिल की बीमारी का खतरा भी 23% तक बढ़ जाता है।
- कम नींद भी खतरनाक, लेकिन...: स्टडी यह भी कहती है कि 7 घंटे से कम नींद लेना भी सेहत के लिए उतना ही खतरनाक है, जैसा कि हम पहले से जानते हैं।
इसका मतलब यह है कि नींद एक दो-धारी तलवार की तरह है। इसका कम होना भी नुकसानदेह है, और इसका बहुत ज्यादा होना भी उतना ही खतरनाक।
तो आखिर इतना सोना खतरनाक क्यों है?
वैज्ञानिक अभी भी इसके सटीक कारणों का पता लगा रहे हैं, लेकिन इसके पीछे कुछ संभावित वजहें यह हो सकती हैं:
- अंदर छिपी बीमारी का संकेत: हो सकता है कि बहुत ज्यादा नींद आना अपने आप में कोई समस्या न हो, बल्कि यह शरीर के अंदर पल रही किसी और बीमारी, जैसे कि डिप्रेशन, क्रोनिक इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन), या किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या का एक लक्षण हो।
- खराब नींद की क्वालिटी: कई बार हम बिस्तर पर तो 9-10 घंटे बिताते हैं, लेकिन हमारी नींद की क्वालिटी (Quality of Sleep) बहुत खराब होती है। हम बार-बार जागते हैं या गहरी नींद में नहीं सो पाते। इस खराब नींद की भरपाई करने के लिए हमारा शरीर और ज्यादा सोने की मांग करता है।
- शारीरिक निष्क्रियता: जो लोग बहुत ज्यादा सोते हैं, वे स्वाभाविक रूप से शारीरिक रूप से कम सक्रिय होते हैं। यह निष्क्रियता ही अपने आप में मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों की जड़ है।
तो 'गोल्डन नंबर' क्या है?
इस स्टडी का सार यह है कि नींद की मात्रा से ज्यादा, नींद की गुणवत्ता (Quality) और नियमितता (Consistency) मायने रखती है।
ज्यादातर वयस्कों के लिए, 7 से 8 घंटे की नींद को ही सबसे आदर्श और स्वस्थ माना गया है।
इसलिए, अगली बार जब आप वीकेंड पर आलस में देर तक बिस्तर पर पड़े रहने का मन बनाएं, तो इस स्टडी को जरूर याद कर लीजिएगा। अच्छी सेहत का रास्ता न तो बहुत कम सोने में है, और न ही बहुत ज्यादा। असली राज, 'संतुलन' में छिपा है।