Market Crash: नए कारोबारी साल के पहले दिन घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट, जानिए क्या है इस गिरावट की वजह

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बाजार में गिरावट: नए कारोबारी साल यानी वित्त वर्ष 26 के पहले कारोबारी सत्र में स्थानीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते बाजार में गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निचले स्तरों से तेज रिकवरी देखने को मिली। हालांकि, कुछ देर बाद एक बार फिर दिन के उच्चतम स्तर से बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दोनों प्रमुख सूचकांक – निफ्टी और सेंसेक्स – में 1% से अधिक की गिरावट आई। आईटी शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई टैरिफ योजना को लेकर चिंता और आईटी शेयरों में कमजोरी ने आज बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा दिया। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 1,176.84 अंक या 1.52% गिरकर 76,238.08 पर आ गया। वहीं, निफ्टी 294.65 अंक यानी 1.25 फीसदी की गिरावट के साथ 23,224.70 पर बंद हुआ।

बजाज फिनसर्व, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक सबसे कमजोर निफ्टी शेयरों की सूची में सबसे ऊपर रहे, जिनमें 3% तक की बिकवाली देखी गई। निफ्टी आईटी सूचकांक में 2.4% की गिरावट आई। इस सूचकांक के सभी 10 शेयर लाल निशान में कारोबार करते देखे गए। परसिस्टेंट सिस्टम, OFSS, कोफोर्ज में गिरावट देखी गई।

बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण क्या है?

ट्रम्प की टैरिफ योजना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 2 अप्रैल को अपने “मुक्ति दिवस” ​​के अवसर पर पारस्परिक टैरिफ लागू करने वाले हैं। इससे बाजार में भय बढ़ गया है। ट्रम्प पहले ही कनाडा, मैक्सिको और चीन जैसे देशों पर टैरिफ लगा चुके हैं। अब ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्युमीनियम, तांबा, फार्मा, सेमीकंडक्टर और यहां तक ​​कि लकड़ी पर भी टैरिफ लगाने पर चर्चा हो रही है।

कच्चे तेल में उछाल

ब्रेंट कच्चा तेल 1.51% बढ़कर 74.74 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। इसलिए यह वृद्धि बाजार के लिए चिंता का विषय है। तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण देश की आयात लागत बढ़ जाती है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव पड़ता है।

अमेरिका में मंदी का खतरा

गोल्डमैन सैक्स ने अमेरिका में मंदी का जोखिम 20% से बढ़ाकर 35% कर दिया है। इसके पीछे ट्रम्प के टैरिफ को कारण बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ में भी मंदी की आशंका व्यक्त की गई है। इसके कारण वैश्विक निवेशकों का मूड खराब हो रहा है।

विदेशी निवेशकों द्वारा बिक्री

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बेचने के लिए वापस आ गए हैं। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को एफआईआई ने 4,352.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।