Maldives Foreign Reserves : चीन की दोस्ती पड़ी भारी, श्रीलंका बनने की राह पर मालदीव? अब दुनिया के सामने फैलाया हाथ

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News India Live, Digital Desk: Maldives Foreign Reserves : खूबसूरत नीले समंदर और शानदार रिजॉर्ट्स के लिए मशहूर देश मालदीव आज एक बड़े आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ा है। हालत इतनी गंभीर हो गई है कि देश का खजाना लगभग खाली हो चुका है और उस पर चीन का भारी-भरकम कर्ज चढ़ गया है। जो देश कुछ समय पहले तक भारत को आंखें दिखा रहा था, आज वही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के दरवाजे पर मदद के लिए दस्तक दे रहा है।

आखिर इतनी बुरी हालत हुई कैसे?

मालदीव की इस बर्बादी की कहानी के पीछे सबसे बड़ा किरदार चीन को माना जा रहा है। चीन की "कर्ज जाल" वाली नीति ने कई छोटे देशों को मुश्किल में डाला है और मालदीव इसका ताजा उदाहरण बनता दिख रहा है।

  1. चीन का महंगा कर्ज: मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने चीन से नजदीकी बढ़ाने के चक्कर में वहां से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे- एयरपोर्ट और ब्रिज बनाने के लिए भारी मात्रा में कर्ज लिया। ये प्रोजेक्ट देखने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन इनसे इतनी कमाई नहीं हो रही कि कर्ज की किश्तें चुकाई जा सकें। आज मालदीव के कुल विदेशी कर्ज का एक बड़ा हिस्सा अकेले चीन का है।
  2. खत्म होता विदेशी मुद्रा भंडार: किसी भी देश को दूसरे देशों से जरूरी सामान (जैसे- पेट्रोल, दवाइयां, अनाज) खरीदने के लिए डॉलर की जरूरत होती है, जिसे विदेशी मुद्रा भंडार कहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मालदीव का यह खजाना खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। बताया जा रहा है कि उनके पास सिर्फ एक या डेढ़ महीने के आयात के लिए ही डॉलर बचे हैं। अगर यह पैसा खत्म हो गया, तो देश में जरूरी चीजों की भारी किल्लत हो सकती है।

"इंडिया आउट" की नीति पड़ी भारी

जब से मोहम्मद मुइज्जू की सरकार आई ہے, उन्होंने "इंडिया आउट" कैंपेन को हवा दी और भारत के साथ रिश्ते खराब कर लिए। भारत हमेशा से मालदीव का एक भरोसेमंद पड़ोसी और मुश्किल समय में मदद करने वाला दोस्त रहा है। भारत से दूरी बनाने और चीन को गले लगाने की नीति अब मालदीव को ही भारी पड़ रही है। जब संकट के बादल छाए, तो चीन से उतनी मदद नहीं मिली जितनी उम्मीद थी और भारत से खराब रिश्तों के चलते वहां से भी मदद मांगना मुश्किल हो गया।

अब IMF ही आखिरी सहारा

चारों तरफ से निराश होने के बाद अब मालदीव की सरकार ने IMF से एक बड़े बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत शुरू कर दी है। IMF से कर्ज मिलने का मतलब होता है कि देश को चलाने के लिए पैसा तो मिल जाएगा, लेकिन बदले में उन्हें कई कड़ी आर्थिक शर्तें भी माननी पड़ेंगी, जिसका सीधा असर वहां की आम जनता पर पड़ सकता है।

मालदीव की यह कहानी दुनिया के उन सभी छोटे देशों के लिए एक सबक है जो चीन के कर्ज को विकास का शॉर्टकट समझते हैं। यह दिखाता है कि कैसे गलत नीतियां और पड़ोसियों से खराब रिश्ते एक खूबसूरत देश को बर्बादी की कगार पर ला सकते हैं।