प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 13 जनवरी से शुरू हुआ यह पवित्र मेला 26 जनवरी को समाप्त होने वाला है। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान करने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु उमड़े, जिनमें कई मशहूर हस्तियां भी शामिल रहीं। सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जिनमें से कुछ ने सनसनी मचा दी।
महाकुंभ में छाईं हर्षा रिछारिया
इस बार महाकुंभ मेले में एक्ट्रेस और एंकर हर्षा रिछारिया ने खूब सुर्खियां बटोरीं। वे साध्वी के अवतार में नजर आईं, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई। उनकी नीली आंखें और लंबे घने बाल लोगों का ध्यान खींचने लगे। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद लोग उन्हें एक नई पहचान देने लगे।
अब साध्वी अवतार से लिया यू-टर्न
हालांकि, कुछ समय बाद हर्षा रिछारिया ने स्पष्ट किया कि वे न तो सन्यासी हैं और न ही साध्वी बनने का इरादा रखती हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने आध्यात्म की ओर कदम बढ़ाए थे, लेकिन लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण उन्होंने यू-टर्न लेने का फैसला किया।
महाकुंभ के दौरान वे भावुक हो गई थीं और रोते हुए मेला छोड़ने की बात कह डाली थी। अब उन्होंने एक और वीडियो शेयर कर बताया कि वे काफी परेशान हैं और इसका कारण भी बताया।
ड्रेडलॉक्स बनवाने के फैसले पर जताया अफसोस
हर्षा रिछारिया ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि उनके जीवन का सबसे बेकार फैसला ड्रेडलॉक्स बनवाना था। उन्होंने वीडियो में लिखा, “मेरा सबसे बेकार फैसला था इस ड्रेडलॉक को लगवाने का लेकिन आप ये कदम सोच-समझकर उठाएं। हर हर महादेव!”
वीडियो में उन्होंने बताया कि:
- ड्रेडलॉक्स बनवाना आजकल आम हो गया है, साधु-संतों से लेकर युवा तक इसे अपना रहे हैं।
- लेकिन, उन्होंने यह तीन साल से चाहा था और जब बनवाया, तो किसी ने इसके नकारात्मक पहलुओं के बारे में नहीं बताया।
- माइग्रेन के मरीजों को सिर दर्द हो सकता है, सोने में दिक्कत होती है, ये बहुत ज्यादा खिंचते हैं जिससे एलर्जी और संक्रमण हो सकता है।
- पहले एक शैंपू की बोतल डेढ़ से दो महीने चलती थी, अब तीन-चार वॉश में ही खत्म हो जाती है।
- ड्रेडलॉक्स पानी में भारी हो जाते हैं, जिससे सिर पर वजन बढ़ जाता है और हर 15-20 दिन में मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है।
विवादों में भी रहीं हर्षा
महाकुंभ में अपनी खूबसूरती और साध्वी अवतार के चलते चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया कुछ विवादों में भी घिरीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके गुरुदेव कैलाशानंद गिरि जी महाराज का अपमान किया गया और उनकी छवि खराब करने की कोशिश हुई।
उन्होंने साफ किया कि उन्होंने कभी साध्वी होने का दावा नहीं किया बल्कि धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की थी। मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हर्षा अब वापस लौटने के बाद भी इंस्टाग्राम पर धार्मिक पोस्ट शेयर कर रही हैं। उनका ग्लैमरस अवतार अब पूरी तरह से बदल चुका है, और वे एक साधारण जीवन जी रही हैं।
आगे क्या?
महाकुंभ में अपने सफर के बाद, हर्षा रिछारिया अब एक नई राह पर हैं। वे आध्यात्म से जुड़ी हुई हैं लेकिन पूरी तरह सन्यास नहीं लिया है। उनकी कहानी लोगों के लिए एक सीख भी है कि हर निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए।