Lord Shiva Worship : भगवान शिव को प्रसन्न करने का दिन ,आज प्रदोष व्रत में कौन सा मुहूर्त है सबसे खास?

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News India Live, Digital Desk: Lord Shiva Worship : आज है प्रदोष व्रत और अगर आप भोलेनाथ के भक्त हैं, तो यह दिन आपके लिए बहुत खास है! भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व है और यह हर महीने की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है. कहते हैं, इस दिन सही समय पर पूजा करने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा करते वक्त हमें 'भद्रा काल' और 'प्रदोष काल' जैसी कुछ बातों का भी ध्यान रखना चाहिए?

क्या है प्रदोष काल और क्यों है यह इतना खास?

प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का वो समय होता है, जब भगवान शिव सबसे ज्यादा प्रसन्नचित्त होते हैं और आसानी से भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं. मान्यता है कि इस समय सभी देवता भोलेनाथ के साथ मिलकर संध्या वंदन करते हैं. इसलिए प्रदोष व्रत में इस विशिष्ट समय पर ही पूजा का विशेष महत्व है. पूजा, आरती और मंत्र जाप इसी 'प्रदोष काल' में करने से शिवजी की असीम कृपा बरसती है.

भद्रा काल और प्रदोष काल में अंतर को समझना ज़रूरी:

अक्सर लोग भद्रा काल और प्रदोष काल को लेकर थोड़ा असमंजस में रहते हैं. जहाँ प्रदोष काल भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ होता है, वहीं 'भद्रा काल' को ज्योतिष में एक अशुभ अवधि माना जाता है. भद्रा के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, विवाह, या यहाँ तक कि व्रत-त्यौहारों की विशेष पूजा करने से बचना चाहिए. भद्रा का प्रभाव इतना होता है कि इस समय शुरू किए गए काम में बाधाएं आ सकती हैं या फिर वो पूरी तरह से सफल नहीं हो पाता.

पूजा का सही मुहूर्त:

प्रदोष व्रत का मुख्य पूजा का समय सूर्यास्त के बाद से लेकर रात में लगभग सवा घंटे तक का होता है. अगर आप चाहते हैं कि आपकी पूजा सफल हो और उसका पूरा फल मिले, तो हमेशा किसी ज्ञानी पंडित से सही मुहूर्त ज़रूर पूछ लें. आजकल इंटरनेट पर भी इसकी जानकारी आसानी से मिल जाती है. कोशिश करें कि प्रदोष काल शुरू होने से पहले ही स्नान आदि करके तैयार हो जाएँ और ठीक समय पर भगवान शिव का ध्यान शुरू करें.

इस दिन शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और भगवान शिव को बेलपत्र, दूध, जल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है. याद रखें, श्रद्धा और विश्वास से की गई प्रार्थना का फल महादेव अवश्य देते हैं.