Lord Krishna : जनमाष्टमी पर खीरा काटने का गहरा अर्थ माँ से विछोह का प्रतीक
- by Archana
- 2025-08-11 11:46:00
Newsindia live,Digital Desk: Lord Krishna : जनमाष्टमी में भगवान कृष्ण का जन्म अर्धरात्रि में होता है और इसी के चलते एक खास परंपरा का पालन किया जाता है कटे खीरे का प्रयोग क्यों होता है यह एक पुरानी मान्यता से जुड़ा है मान्यता है कि यह माँ देवकी से भगवान श्रीकृष्ण को गर्भ से निकालने की प्रक्रिया का प्रतीक है जैसे एक बच्चे को उसकी माँ से अलग किया जाता है वैसे ही खीरे को डंठल से काटकर अलग किया जाता है यह बच्चे के गर्भ से सुखद और प्रतीकात्मक जन्म का कार्य है खीरे का डंठल नाल का और खीरा बच्चे का प्रतीक माना जाता है बिना खीरा काटे भगवान कृष्ण को प्रतीकात्मक रूप से गर्भ से बाहर निकालना असंभव माना जाता है ऐसा नहीं करने पर बच्चा रो सकता है ऐसी भी एक मान्यता है
यह शुभ मानी जाने वाली खीरा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है पूजा अनुष्ठानों में शामिल खीरा एक पवित्र और अभिन्न अंग है यह परंपरा नवजात भगवान कृष्ण के अपनी माँ देवकी से आरामदायक अलगाव को दर्शाती है खीरे को तोड़ना माँ से नवजात शिशु के प्रतीक को खुशी खुशी स्वीकार करने का एक तरीका है भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में हुआ उनका जन्म मथुरा में कंस के कारागार में हुआ था वे रात में पैदा हुए और तूफान तथा तेज बारिश के बीच वृंदावन भेजे गए उनके पिता वासुदेव ने नदी पार करके बालक कृष्ण को यशोदा मैया और नंद बाबा को सौंपा जनमाष्टमी का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है लोग इस दिन व्रत रखते हैं भजन कीर्तन करते हैं मंदिरों में जाते हैं और भगवान को फूल मालाएं मिठाई तथा अन्य पकवान का भोग लगाते हैं
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