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April 22 2026 09:44 am

नक्सलियों को आखिरी चेतावनी सरेंडर करो या मरने को तैयार रहो, डीजी दीपक कुमार ने दिया एक महीने का अल्टीमेटम

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News India Live, Digital Desk: झारखंड के सारंडा जंगलों से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए सुरक्षाबलों ने कमर कस ली है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के स्पेशल डायरेक्टर जनरल (DG) दीपक कुमार ने शनिवार को प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के नक्सलियों को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने पश्चिम सिंहभूम के बालिबा कैंप में सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि नक्सलियों के पास अब केवल एक महीने का समय है; वे या तो आत्मसमर्पण करें या फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

मिसिर बेसरा का दस्ता सुरक्षाबलों के घेरे में

स्पेशल डीजी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षाबलों का सबसे बड़ा टारगेट पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर है। वर्तमान में मिसिर बेसरा अपने 40-45 साथियों के साथ सारंडा के घने जंगलों में घिरा हुआ है। सुरक्षाबलों ने लगभग 21 वर्ग किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया है। दीपक कुमार ने कहा, "मिसिर बेसरा और उसके दस्ते के पास अब भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमाएं ब्लॉक कर दी गई हैं और उनकी रसद आपूर्ति (Supply Line) काट दी गई है।"

"हर जान कीमती, पर अब निर्णायक लड़ाई का समय"

दीपक कुमार ने भावुक लेकिन सख्त लहजे में कहा कि नक्सली भी इसी देश के नागरिक हैं और हम नहीं चाहते कि किसी की जान जाए। उन्होंने कहा, "हम उन्हें एक महीने का समय दे रहे हैं ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट आएं। लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अब मुठभेड़ अंतिम और निर्णायक होगी।" गौरतलब है कि हाल ही में सुरक्षाबलों ने चार नक्सलियों को मार गिराया है, जिससे नक्सली संगठन पूरी तरह बैकफुट पर हैं।

सारंडा के बालिबा कैंप में बनी महा-रणनीति

स्पेशल डीजी ने बालिबा स्थित सीआरपीएफ कैंप में करीब दो घंटे तक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार सिंह, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे और पश्चिम सिंहभूम के एसपी अमित रेणु सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान ऑपरेशन के ब्लूप्रिंट को अंतिम रूप दिया गया। डीजी ने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि झारखंड को बहुत जल्द नक्सल मुक्त घोषित किया जाएगा।

बीमार जवानों का भी रखा ख्याल

मीडिया से बातचीत के दौरान स्पेशल डीजी की संवेदनशीलता भी देखने को मिली। जब वे प्रेस को संबोधित कर रहे थे, तभी मलेरिया से पीड़ित एक जवान बेहोश हो गया। दीपक कुमार ने तुरंत अपना संबोधन रोका और बीमार जवानों को बेहतर इलाज के लिए अपने ही हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर रांची भेजने के निर्देश दिए। कुल सात जवानों को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। यह दिखाता है कि नेतृत्व न केवल ऑपरेशन बल्कि अपने जवानों की सेहत के प्रति भी पूरी तरह गंभीर है।