Kukke Subramanya Temple : काल सर्प दोष से परेशान हैं? कर्नाटक के इस मंदिर में माथा टेकते ही दूर हो जाता है ग्रहों का साया
News India Live, Digital Desk : अगर आप कभी कर्नाटक घूमने का प्लान बनाएं और धार्मिक स्थलों में रुचि रखते हैं, तो 'कुक्के सुब्रमण्यम' आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए। मेंगलुरु (Mangaluru) के पास पश्चिमी घाट (Western Ghats) की खूबसूरत वादियों में बसा यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ का वातावरण भी मन को एक अलग ही शांति देता है।
किस भगवान का है ये मंदिर?
आमतौर पर हम भगवान कार्तिकेय (भगवान शिव और पार्वती के पुत्र) को 'युद्ध के देवता' के रूप में जानते हैं, लेकिन यहाँ उनकी पूजा एकदम अलग रूप में होती है। यहाँ उन्हें 'सुब्रमण्य' कहा जाता है, जो सभी सांपों के रक्षक माने जाते हैं। गर्भगृह में भगवान कार्तिकेय के साथ-साथ नागराज वासुकि और शेषनाग भी विराजमान हैं।
यहाँ क्यों लगती है इतनी भीड़? (काल सर्प दोष का अचूक इलाज)
आपने अक्सर पंडितों या ज्योतिषियों को 'काल सर्प दोष' के बारे में बात करते सुना होगा। कहते हैं कि जिसकी कुंडली में यह दोष होता है, उसके बनते काम बिगड़ जाते हैं और जीवन संघर्षों से भर जाता है।
माना जाता है कि कुक्के सुब्रमण्यम मंदिर इस दोष के निवारण के लिए धरती की सबसे सिद्ध जगह है। यहाँ दो खास पूजाएं होती हैं—'सर्प संस्कार' (Sarpa Samskara) और 'आश्लेषा बलि' (Ashlesha Bali)। लोग कहते हैं कि यहाँ पूरी श्रद्धा से पूजा कराने के बाद उनकी ज़िंदगी से बाधाएं खत्म हो गई। यही वजह है कि क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर से लेकर अमिताभ बच्चन और कई बड़े राजनेता भी यहाँ पूजा करवा चुके हैं।
क्या है पौराणिक कथा?
इसके पीछे एक बड़ी दिलचस्प कहानी है। पुराणों के अनुसार, गरुड़ (जो पक्षियों के राजा हैं) नागों का शिकार करते थे। अपनी जान बचाने के लिए नागों के राजा 'वासुकि' इसी जगह की गुफाओं में आकर छिप गए और भगवान शिव की तपस्या की। तब भगवान कार्तिकेय ने वहां प्रकट होकर गरुड़ से वासुकि की रक्षा की और अभयदान दिया। तभी से यह माना जाता है कि जो भी यहाँ आएगा, उस पर सर्प दोष या विष का असर नहीं होगा।
यहाँ की मिट्टी भी है खास
इस मंदिर की एक और खासियत है। यहाँ प्रसाद के रूप में 'मृत्तिका' यानी वहां के वल्मीक (बम्बी) की मिट्टी दी जाती है। भक्त मानते हैं कि इस मिट्टी में औषधीय गुण होते हैं जो कई बीमारियों, खासकर त्वचा रोगों को ठीक कर सकती है।
कब और कैसे जाएं?
यह मंदिर "कुमार पर्वत" (Kumara Parvatha) की तलहटी में बसा है और उसके बगल से 'कुमारधारा नदी' बहती है। भक्त पहले नदी में डुबकी लगाते हैं और फिर दर्शन के लिए जाते हैं। जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों का है, क्योंकि मानसून में यहाँ बहुत भारी बारिश होती है।
तो दोस्तों, अगर आप भी किसी ज्योतिषीय उपाय की तलाश में हैं या बस प्रकृति की गोद में किसी शांत, दिव्य स्थान पर जाना चाहते हैं, तो कुक्के सुब्रमण्यम आपके स्वागत के लिए तैयार है।