बजट 2025 में यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (ULIP) के रिडेम्प्शन और मैच्योरिटी पर लगने वाले टैक्स को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। खासतौर पर उन ULIP पॉलिसीधारकों के लिए यह बदलाव अहम है, जिनकी सालाना प्रीमियम राशि ₹2.5 लाख से अधिक है।
सरल शब्दों में कहें तो ऐसी ULIP पॉलिसियां, जिन्हें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(10D) के तहत टैक्स छूट नहीं मिलती थी, अब उन्हें इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड की तरह माना जाएगा। इससे निवेशकों के रिटर्न पर टैक्स का असर पड़ेगा और कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में आएंगे।
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह बदलाव निवेशकों को कैसे प्रभावित करेगा।
बजट 2025 में ULIP पर टैक्स के नए नियमों का असर
1. ULIP को अब कैपिटल एसेट माना जाएगा
बजट 2025 के अनुसार, वे ULIP पॉलिसियां जो सेक्शन 10(10D) के तहत टैक्स छूट के योग्य नहीं हैं, उन्हें अब कैपिटल एसेट्स माना जाएगा।
इसका मतलब यह है कि अगर आप ULIP की मैच्योरिटी राशि या रिडेम्प्शन अमाउंट प्राप्त करते हैं, तो उसे इक्विटी फंड की तरह कैपिटल गेन के रूप में देखा जाएगा और इस पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
2. कैपिटल गेन टैक्स कैसे लागू होगा?
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर ULIP पॉलिसी को 12 महीने से ज्यादा हो गए हैं और मैच्योरिटी पर लाभ ₹1.25 लाख से अधिक है, तो इस पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर ULIP को 12 महीने के भीतर रिडीम किया जाता है, तो इस पर 20% टैक्स लगेगा।
पहले: ULIP की मैच्योरिटी राशि पूरी तरह टैक्स फ्री होती थी।
अब: बड़ी प्रीमियम वाली ULIP पॉलिसियों पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा।
सेक्शन 10(10D) – कौन सी ULIP पॉलिसी टैक्स फ्री रहेगी?
इनकम टैक्स एक्ट की सेक्शन 10(10D) के तहत कुछ लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर मिलने वाली मैच्योरिटी या क्लेम राशि पूरी तरह टैक्स फ्री होती है।
लेकिन इसमें कुछ शर्तें होती हैं:
- अगर पॉलिसी का सालाना प्रीमियम सम एश्योर्ड (बीमा राशि) का 10% से अधिक नहीं है, तो मैच्योरिटी पर टैक्स छूट मिलेगी।
- अगर प्रीमियम ₹2.5 लाख से अधिक नहीं है, तो ULIP की मैच्योरिटी राशि टैक्स फ्री होगी।
- 1 फरवरी 2021 के बाद जारी की गई ULIP पॉलिसियों पर यह नियम लागू है।
अगर इन शर्तों को पूरा नहीं किया जाता, तो उस पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
ULIP और म्यूचुअल फंड – अब क्या अंतर रह गया?
पहले, ULIP और म्यूचुअल फंड के बीच मुख्य अंतर यह था कि ULIP पर टैक्स छूट मिलती थी, जबकि म्यूचुअल फंड पर नहीं। लेकिन बजट 2025 के बाद, अगर ULIP का सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से ज्यादा है, तो उसे भी म्यूचुअल फंड की तरह टैक्सेबल कैटेगरी में डाल दिया गया है।
पैरामीटर | पहले (2024 तक) | अब (बजट 2025 के बाद) |
---|---|---|
टैक्स छूट | पूरी तरह टैक्स फ्री | ₹2.5 लाख से ज्यादा प्रीमियम पर टैक्स लागू |
टैक्स कैटेगरी | इंश्योरेंस पॉलिसी | इक्विटी फंड (कैपिटल एसेट) |
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन | लागू नहीं | 12.5% (₹1.25 लाख से ज्यादा लाभ पर) |
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन | लागू नहीं | 20% (12 महीने से कम होल्डिंग पर) |
ULIP होल्डर्स को क्या करना चाहिए?
1. नए ULIP खरीदने से पहले विचार करें
अगर आप ₹2.5 लाख से अधिक प्रीमियम वाली ULIP पॉलिसी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब इसे म्यूचुअल फंड से अलग नहीं माना जाएगा। इसलिए, ULIP और म्यूचुअल फंड की तुलना करके सही निवेश का निर्णय लें।
2. पहले से खरीदी गई ULIP को होल्ड करें या छोड़ दें?
अगर आपकी पॉलिसी 1 फरवरी 2021 के बाद खरीदी गई थी और उसका सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से ज्यादा है, तो आपको नए टैक्स नियमों का सामना करना पड़ेगा।
- अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो इसे होल्ड करना फायदेमंद हो सकता है।
- लेकिन अगर टैक्स लागू होने से आपका रिटर्न कम हो रहा है, तो म्यूचुअल फंड या अन्य टैक्स-फ्री इंवेस्टमेंट ऑप्शन पर विचार करें।
3. पॉलिसी की प्रीमियम राशि को नियंत्रित करें
अगर आप ULIP का फायदा उठाना चाहते हैं और टैक्स छूट बनाए रखना चाहते हैं, तो सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से कम रखें।