आधार कार्ड: पहचान पत्र या नागरिकता का सबूत? जानिए पूरा सच
आधार कार्ड! आजकल सिम कार्ड लेने से लेकर बैंक खाता खुलवाने तक, हर जगह इसकी ज़रूरत पड़ती है। यह हमारी पहचान का सबसे बड़ा सबूत बन गया है। लेकिन क्या यह हमारी नागरिकता का भी सबूत है?
ज़्यादातर लोगों का जवाब होगा, "हाँ, बिल्कुल!"। लेकिन ठहरिए, यहीं पर हम सब एक बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। खुद आधार कार्ड बनाने वाली सरकारी संस्था UIDAI (Unique Identification Authority of India) के प्रमुख ने इस पर एक बहुत बड़ी और ज़रूरी जानकारी दी है।
UIDAI ने क्या साफ़ किया?
UIDAI के CEO अमित अग्रवाल ने साफ़-साफ़ कहा है कि आधार कार्ड भारत में रहने का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। इसका मतलब है कि आधार कार्ड यह तो बताता है कि आप भारत में रहते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करता कि आप भारत के नागरिक ही हैं।
तो फिर फ़र्क क्या है? चलिए आसान भाषा में समझते हैं
इसको एक उदाहरण से समझिए। कोई व्यक्ति जो किसी दूसरे देश का नागरिक है (जैसे नेपाल, बांग्लादेश या अमेरिका), लेकिन पढ़ाई या नौकरी के लिए कानूनी रूप से भारत में रह रहा है, तो वह भी अपना आधार कार्ड बनवा सकता है।
आधार का नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, अगर वह पिछले 12 महीनों में 182 दिन (यानी लगभग 6 महीने) से ज़्यादा भारत में रहा है, तो वह आधार कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है।
आधार कार्ड आपकी बायोमेट्रिक पहचान (उंगलियों के निशान, आँखों की पुतली) और आपके पते का एक सबूत है।
जबकि, नागरिकता एक अलग कानूनी अधिकार है। नागरिकता यह साबित करती है कि आप किस देश के हैं और उस देश के प्रति आपकी क्या ज़िम्मेदारियाँ और अधिकार हैं। भारत की नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या वोटर आईडी कार्ड जैसे दस्तावेज़ ज़्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।
यह बात अचानक सामने क्यों आई?
यह पूरा मामला बिहार में होने वाले चुनावों के संदर्भ में सामने आया है, जहाँ दस्तावेज़ों की जाँच को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। UIDAI ने यह स्पष्टीकरण देकर उस भ्रम को दूर करने की कोशिश की है जो आधार को नागरिकता से जोड़कर देखता है।
तो अगली बार से याद रखिएगा, आधार आपकी पहचान और पते के लिए एक मज़बूत दस्तावेज़ है, लेकिन यह आपकी भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है।