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April 30 2026 02:27 am

Karnataka Government : जांच में बेदाग़ निकले सिद्धारमैया, MUDA घोटाले में परिवार को मिली क्लीन चिट, मंत्री ने किया ऐलान

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News India Live, Digital Desk: Karnataka Government : कर्नाटक की राजनीति में हलचल मचाने वाले MUDE (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) भूमि आवंटन मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है. कर्नाटक सरकार के कानून मंत्री एचके पाटिल ने ऐलान किया है कि मुख्यमंत्री या उनके परिवार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और जांच में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है. इस घोषणा के साथ ही सिद्धारमैया पर लगे भ्रष्टाचार के बड़े आरोप खारिज हो गए हैं.

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद एक जमीन के टुकड़े को लेकर था. आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री रहते हुए MUDA ने अवैध रूप से उनके परिवार के सदस्यों को एक महंगी जमीन आवंटित कर दी थी. इस मामले में उनकी पत्नी पार्वती, बेटे यतींद्र (जो कांग्रेस विधायक हैं), बहू स्मिता और अन्य रिश्तेदारों के नाम सामने आए थे.

आरोप लगाने वालों का कहना था कि यह जमीन उन लोगों को मिलनी चाहिए थी जिनकी जमीन किसी प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थी, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इसे मुख्यमंत्री के परिवार को दे दिया गया. इस मुद्दे को विपक्ष, खासकर बीजेपी ने जोर-शोर से उठाया था और इसे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का एक बड़ा उदाहरण बताया था. इस मामले की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट का सभी को इंतजार था.

सरकार ने क्या कहा?

अब सरकार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर अपना फैसला सुना दिया है. कानून मंत्री एचके पाटिल ने विधानसभा में बताया कि जस्टिस एचएन नागमोहन दास की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीन के आवंटन की प्रक्रिया में किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है और न ही इसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया या उनके परिवार के किसी सदस्य की कोई भूमिका थी.

पाटिल ने कहा, "आयोग ने साफ कर दिया है कि आवंटन पूरी तरह से नियमों के तहत किया गया था और सिद्धारमैया के परिवार को इस मामले में बेदाग पाया गया है." सरकार ने आयोग की इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है.

इस क्लीन चिट से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस पार्टी ने राहत की सांस ली है. वहीं, विपक्ष अब सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा सकता है. लेकिन फिलहाल, कर्नाटक के सबसे चर्चित घोटालों में से एक में मुख्यमंत्री का परिवार पाक-साफ साबित हुआ है.