काराकाट में कमल ने मारी बाजी, कांटे की टक्कर में JDU को मिली हार
News India Live, Digital Desk: बिहार की सबसे दिलचस्प सीटों में से एक काराकाट विधानसभा सीट पर इस बार चुनावी नतीजे बेहद अप्रत्याशित रहे। एक कड़े और रोमांचक मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) और महागठबंधन के प्रत्याशी को पछाड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की। यह JDU के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह सीट पिछले कई चुनावों से उसके कब्जे में थी।
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी थी सीट
काराकाट विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। मैदान में मुख्य रूप से JDU के कद्दावर नेता और मौजूदा विधायक महाबली सिंह, महागठबंधन की ओर से CPI(ML) के अरुण कुमार और बीजेपी के उम्मीदवार थे। मतगणना की शुरुआत से ही इन तीनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। हर राउंड के साथ वोटों का अंतर घटता-बढ़ता रहा, जिससे आखिरी नतीजों तक सस्पेंस बना रहा।
कभी महाबली सिंह आगे निकलते, तो कभी अरुण कुमार, लेकिन अंतिम राउंड की गिनती में बीजेपी प्रत्याशी ने ऐसी बढ़त बनाई जिसे कोई पार नहीं कर सका। इस जीत ने यह साफ कर दिया कि काराकाट की जनता इस बार 'बदलाव' के मूड में थी।
क्यों हुई JDU की हार?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि JDU की हार के पीछे कई बड़े कारण हो सकते हैं। एक तरफ जहां स्थानीय स्तर पर मौजूदा विधायक के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) का माहौल था, वहीं CPI(ML) के उम्मीदवार अरुण कुमार ने भी महागठबंधन के वोटों में अच्छी-खासी सेंधमारी की। इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला। बीजेपी उम्मीदवार ने सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के वोटों को सफलतापूर्वक अपने पक्ष में लामबंद किया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पड़े वोटों ने भी जीत में एक बड़ी भूमिका निभाई।
CPI(ML) का दमदार प्रदर्शन
भले ही CPI(ML) के अरुण कुमार यह चुनाव जीत नहीं पाए, लेकिन उनके प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने जेडीयू और बीजेपी के मजबूत उम्मीदवारों को जिस तरह की टक्कर दी, वह काबिले-तारीफ है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि वामपंथी दल एक बार फिर बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, काराकाट का यह नतीजा बिहार की बदलती राजनीतिक हवा का एक बड़ा संकेत है। यहां की जनता ने साफ कर दिया है कि वह किसी एक पार्टी या नेता के नाम पर बंधकर नहीं रहेगी और विकास तथा स्थानीय मुद्दों पर ही अपना फैसला सुनाएगी।