JTET 2026 Cancelled: झारखंड में फिर फंसा भाषा का पेंच रद्द होगा शिक्षक पात्रता परीक्षा का विज्ञापन
News India Live, Digital Desk: झारखंड में करीब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आयोजित होने जा रही झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 एक बार फिर विवादों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने स्थानीय भाषाओं को लेकर बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच जेटेट नियमावली 2026 और इसके विज्ञापन को रद्द करने का मन बना लिया है। 21 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली आवेदन प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है, जिससे राज्य के लाखों बीएड और डीएलएड प्रशिक्षित युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
इस पूरे विवाद की जड़ में वह नई नियमावली है, जिसमें भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को स्थानीय भाषा की सूची से हटा दिया गया था।
मंत्रियों का विरोध: कैबिनेट की बैठक में भी मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपक बिरुआ और दीपिका पांडेय सिंह ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया। उनका तर्क है कि पलामू और संताल परगना जैसे क्षेत्रों में बड़ी आबादी ये भाषाएं बोलती है, ऐसे में इन्हें हटाना अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।
विपक्ष का हमला: भाजपा ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे 'दोहरा मापदंड' और 'क्षेत्रीय भेदभाव' करार दिया है।
विज्ञापन रद्द होने के 3 बड़े कारण:
भाषाई असहमति: क्षेत्रीय भाषाओं की सूची को लेकर सरकार के भीतर और बाहर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
कानूनी पेच: नियमावली में विसंगतियों के कारण परीक्षा के भविष्य में कोर्ट में फंसने का डर था।
कैबिनेट की मंजूरी का अभाव: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने मंत्रिपरिषद की 'प्रत्याशा' में विज्ञापन निकाल दिया था, लेकिन अब कैबिनेट ने इस पर मुहर लगाने के बजाय प्रस्ताव को स्थगित कर दिया है।
10 साल का इंतजार और बढ़ गया
झारखंड में आखिरी बार टीईटी (TET) का आयोजन 2016 में हुआ था। तब से लेकर अब तक:
लाखों अभ्यर्थी प्रभावित: 2016 के बाद बीएड करने वाले अभ्यर्थी न तो किसी शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल हो पाए हैं और न ही सीधी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा बन सके हैं।
अनिश्चित काल के लिए टली परीक्षा: विज्ञापन रद्द होने का मतलब है कि अब नई नियमावली बनने और फिर से विज्ञापन जारी होने में महीनों का समय लग सकता है।
आगे क्या होगा?
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री अब इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं और एक ऐसी नई सूची तैयार करने के निर्देश दे सकते हैं जिसमें सभी प्रमुख क्षेत्रीय बोलियों को स्थान मिले। जब तक नई नियमावली को कैबिनेट से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक जेटेट 2026 की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में रहेगी।