JMM Mission 2026 : असम और बंगाल के चुनाव में उतरेंगे हेमंत सोरेन चाय बागान के मजदूरों और आदिवासियों पर टिकी नजर

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News India Live, Digital Desk: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में मिली प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हौसले बुलंद हैं। अब जेएमएम (JMM) केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहती। हेमंत सोरेन ने असम के तिनसुकिया में आयोजित 'आदिवासी महासभा' में हुंकार भरते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे असम और पश्चिम बंगाल के चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रहे हैं। इसे सीधे तौर पर असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ एक 'राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक' के रूप में देखा जा रहा है।

असम के 'टी-ट्राइब्स' (Tea Tribes) पर हेमंत का दांव

असम में लगभग 70 लाख की आबादी 'चाय बागान' से जुड़े आदिवासियों की है। इनमें से अधिकांश मूल रूप से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के हैं, जिन्हें अंग्रेजों के शासनकाल में वहां ले जाया गया था।

एसटी (ST) दर्जे की मांग: हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया है कि असम सरकार इन आदिवासियों को 'शेड्यूल्ड ट्राइब' (ST) का दर्जा नहीं दे रही है, जबकि झारखंड में उनकी बिरादरी को यह हक प्राप्त है।

वोट बैंक की गणित: असम की करीब 35-40 विधानसभा सीटों पर ये चाय बागान मजदूर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। JMM इन्हीं 'झारखंडी मूल' के लोगों को एकजुट कर अपनी पैठ बनाना चाहती है।

पश्चिम बंगाल: जंगलमहल और संताल बेल्ट पर नजर

झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल के जिलों (पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर) में संताल आदिवासियों की बड़ी आबादी है।

शिबू सोरेन का प्रभाव: 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन का इन इलाकों में आज भी काफी सम्मान है।

रणनीति: JMM यहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ गठबंधन कर सकती है या कुछ चुनिंदा सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़कर अपनी ताकत आज़मा सकती है। 2021 के चुनावों में भी हेमंत सोरेन ने झाड़ग्राम में रैलियां की थीं।

हिमंत बिस्वा सरमा बनाम हेमंत सोरेन: 'टिट फॉर टैट'

झारखंड चुनाव के दौरान असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बीजेपी के चुनाव प्रभारी के तौर पर महीनों झारखंड में डेरा डाला था। अब हेमंत सोरेन उसी अंदाज में जवाब दे रहे हैं:

कैबिनेट का बड़ा फैसला: झारखंड की नई सरकार ने पहली कैबिनेट में ही असम के चाय बागान मजदूरों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक सर्वदलीय कमेटी बनाने का निर्णय लिया है।

सीधी चुनौती: सोरेन ने असम सरकार को "व्यापारियों की सरकार" बताते हुए कहा कि वे आदिवासियों का हक मारकर केवल संसाधन बटोर रहे हैं।

[Image showing the map of Assam and Bengal highlighting tribal dominated areas where JMM plans to contest]

क्या JMM बन पाएगी 'किंगमेकर'?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JMM के आने से आदिवासी वोटों का बंटवारा हो सकता है।

असम में: यदि JMM चाय जनजातियों का वोट हासिल करने में सफल रहती है, तो यह बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी होगी।

बंगाल में: बंगाल में बीजेपी ने 2019 और 2021 में आदिवासी इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया था, जिसे रोकने के लिए ममता बनर्जी भी JMM का साथ पसंद कर सकती हैं।