JSSC-CGL मामले में पूर्व DGP अनुराग गुप्ता की बढ़ी मुश्किलें: बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी बोले- साक्ष्यों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

JSSC-CGL मामले में पूर्व DGP अनुराग गुप्ता की बढ़ी मुश्किलें: बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी बोले- साक्ष्यों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

झारखंड के सबसे बड़े बहुचर्चित कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा घोटाले का मामला एक बार फिर से राज्य की सियासत में भूचाल लेकर आ गया है, जहां आए दिन नए खुलासे और राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। इस बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज सवाल खड़े किए हैं। बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए यह सवाल पूछा है कि आखिर क्या वजह है कि पेपर लीक के गंभीर मामलों और जांच को कथित तौर पर प्रभावित करने वाले पूर्व डीजीपी पर सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने से पूरी तरह हिचकिचा रही है। इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम के बाद से झारखंड के बेरोजगार युवाओं और छात्र संगठनों के बीच हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य और करियर से जुड़ा हुआ है। आज के इस विस्तृत आर्टिकल में हम आपको जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से जुड़े इस पूरे विवाद, पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की संदिग्ध भूमिका और बाबूलाल मरांडी द्वारा उठाए गए तीखे सवालों के हर एक पहलू से विस्तार से अवगत कराने जा रहे हैं।

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा विवाद और पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की भूमिका पर क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल

झारखंड में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक होना कोई नया मामला नहीं है, लेकिन इस बार मामला तब और अधिक गंभीर हो गया जब जांच के दायरे में खुद राज्य के सबसे बड़े पुलिस पद पर रह चुके पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता का नाम सामने आया। रिपोर्टों और एसआईटी (SIT) की शुरुआती जांच के अनुसार, जब जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में धांधली के आरोप लगने शुरू हुए थे, उस दौरान सीआईडी (CID) और अन्य स्तरों पर मामलों की लीपापोती करने तथा साक्ष्यों के साथ खिलवाड़ करने के गंभीर आरोप लगे थे। बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पुराना वीडियो साझा करते हुए यह दावा किया है कि पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता ने अपने कार्यकाल के दौरान न सिर्फ पेपर लीक के आरोपों को सिरे से खारिज करने की पूरी कोशिश की थी, बल्कि कथित तौर पर अदालत और उच्च स्तर पर भी तथ्यों को अलग तरीके से पेश करने का प्रयास किया था। भाजपा नेताओं का यह साफ कहना है कि जब जांच एजेंसी के सर्वोच्च पद पर बैठे लोग ही इस तरह के कारनामों में लिप्त पाए जाएं, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना ही बेमानी है, जिसके कारण राज्य के युवाओं का व्यवस्था से भरोसा उठ रहा है।

बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा प्रहार: साक्ष्यों से खिलवाड़ और डिजिटल एविडेंस मिटाने का लगाया आरोप

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के डिजिटल साक्ष्यों और मूल दस्तावेजों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो वर्तमान सीआईडी जांच में नए खुलासे हो रहे हैं और गिरफ्तारियां हो रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पूर्ववर्ती जांच के दौरान मुख्य आरोपियों को बचाने और संरक्षण देने के पुख्ता संकेत मिल रहे हैं। मरांडी ने सरकार से यह कड़ा सवाल किया है कि अगर पिछली सीआईडी जांच सही थी और पेपर लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई थी, जैसा कि उस समय के अधिकारी दावा कर रहे थे, तो अब मौजूदा जांच में इतने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और खुलासे कैसे हो रहे हैं? उन्होंने मांग की है कि पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के पूरे कार्यकाल और उनकी संपत्तियों तथा इस पूरे घोटाले में उनकी संलिप्तता की स्वतंत्र रूप से सीबीआई (CBI) या किसी अन्य निष्केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

झारखंड के युवाओं का भविष्य दांव पर: छात्र संगठनों का आक्रोश और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता का संकट

इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच सबसे ज्यादा पिसने वाला वर्ग राज्य का वह आम युवा और छात्र है जो पिछले कई सालों से दिन-रात एक करके सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहा है और पेपर लीक तथा भ्रष्टाचार के कारण बार-बार निराशा हाथ लगने से गहरे मानसिक तनाव में जीने को मजबूर है। जेएसएससी-सीजीएल जैसी बड़ी परीक्षाओं के रद्द होने, पेपर आउट होने और उसके बाद राजनीतिक दलों के बीच शुरू हुई बयानबाजी ने यह साबित कर दिया है कि झारखंड की व्यवस्था में सुधार के लिए अभी भी बहुत लंबी लड़ाई लड़नी बाकी है। छात्र संगठनों का यह साफ कहना है कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल के जुबानी जमाखर्च से मतलब नहीं है, बल्कि उन्हें न्याय चाहिए और यह सुनिश्चित होना चाहिए कि भविष्य में होने वाली परीक्षाएं पूरी तरह से पारदर्शी हों। यदि सरकार ने जल्द ही इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई नहीं की और दोषियों को बेनकाब नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में एक बड़ा जन आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे सरकार की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।