जिंदगी की क्षणभंगुरता और "अतिम जोहार": झारखंड के कद्दावर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से जेएमएम परिवार में छाया गहरा शोक
झारखंड की राजनीति से इस वक्त एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां हेमंत सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कद्दावर नेता सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक पड़ने से निधन हो गया है। महज 56 वर्ष की उम्र में हुए उनके इस आकस्मिक निधन से न केवल झामुमो परिवार बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में मातम पसर गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत तमाम बड़े नेताओं ने उनके चले जाने पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे एक अपूरणीय क्षति बताया है। अपने जुझारू तेवर, संगठन कौशल और तीन दशकों की लंबी राजनीतिक निष्ठा के दम पर पार्टी में एक खास मुकाम हासिल करने वाले सुदिव्य कुमार सोनू का यूं अचानक चले जाना हर किसी को अंदर तक झकझोर कर रख गया है।
कौन थे सुदिव्य कुमार सोनू और क्या था उनका तीन दशकों का लंबा राजनीतिक सफर
गिरिडीह विधानसभा सीट से दो बार लगातार विधायक चुने जाने वाले सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड की राजनीति में अपनी पहचान किसी राजनीतिक विरासत के बल पर नहीं, बल्कि जमीन से जुड़कर और कड़ा संघर्ष करते हुए बनाई थी। उन्होंने साल 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्राथमिक सदस्यता ली थी और जीवन के अंतिम क्षणों तक पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के लिए समर्पित रहे। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनावी असफलताओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और साल 2019 के विधानसभा चुनाव में पहली बार गिरिडीह सदर सीट से शानदार जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद साल 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी इस सीट को दोबारा मजबूती के साथ बरकरार रखा और हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद करीबी और JMM के संकटमोचक के रूप में थी उनकी पहचान
सुदिव्य कुमार सोनू को केवल एक मंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि जेएमएम के एक मजबूत रणनीतिकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सबसे भरोसेमंद वफादार सहयोगियों में गिना जाता था। पार्टी के अंदरूनी और बाहरी राजनीतिक संकटों के समय वे हमेशा सबसे आगे खड़े नजर आते थे, फिर चाहे वह चुनावी रणनीति तैयार करना हो या फिर हाल ही में विभिन्न परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के दौरान सरकार की तरफ से संवाद स्थापित करने की अहम जिम्मेदारी हो। झारखंड आंदोलन के दिनों से ही पार्टी के साथ गहराई से जुड़े होने के कारण वे पार्टी संस्थापक शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों के ही बेहद करीबी माने जाते थे। उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने अपना एक बड़ा भाई और सहयोगी खो दिया है, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती।
झारखंड मुक्ति मोर्चा और राजनीतिक जगत में शोक की लहर, नम आंखों से दी जा रही है अंतिम विदाई
सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक हुए निधन से पूरा झामुमो संगठन स्तब्ध और मर्माहत है। पार्टी की ओर से आधिकारिक संदेश जारी करते हुए कहा गया कि जिंदगी की क्षणभंगुरता इंसान को झकझोर देती है और कल तक जो साथी हमारे साथ कंधे से कंधا मिलाकर चल रहा था, आज उसकी यादें ही शेष रह गई हैं। पार्टी ने उन्हें नम आंखों से अंतिम 'जोहार' अर्पित करते हुए उनके संघर्ष और समर्पण को हमेशा याद रखने की बात कही है। गिरिडीह स्थित उनके आवास और पैतृक क्षेत्र में शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है, और हर कोई उनकी सादगी तथा जनसेवा के कार्यों को याद कर रहा है। झारखंड की राजनीति ने एक ऐसा जमीन से जुड़ा और ऊर्जावान नेता खो दिया है, जिसकी भरपाई आने वाले लंबे समय तक संभव नहीं हो पाएगी।