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कभी गरीबी और सपनो का उड़ाया गया था क्रूर मजाक, आज रांची की बेटी प्रिया बन चुकी हैं देश की बड़ी फैशन डिजाइनर

कहते हैं कि अगर आपके हौसलों में उड़ान और इरादों में कुछ कर गुजरने की सच्ची जिद हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको अपनी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। झारखंड की राजधानी रांची की एक साधारण सी गली से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली युवा फैशन डिजाइनर प्रिया (Priya) की कहानी इस बात का सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण है। एक समय था जब प्रिया के बड़े सपनों और उनकी आर्थिक स्थिति को देखकर समाज के लोगों ने उनका जमकर मजाक उड़ाया था, लेकिन आज उसी प्रिया ने अपनी बेमिसाल प्रतिभा के दम पर सफलता की एक ऐसी नई इबारत लिख दी है जिसे देखकर हर कोई दंग है। रांची की यह होनहार बेटी आज देश-विदेश की बड़ी हस्तियों के लिए कपड़े डिजाइन कर रही हैं और उनके ब्रांड की धूम भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और सिंगापुर जैसे विकसित देशों के फैशन बाजारों में भी मची हुई है। आइए एक ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से करीब से जानते हैं प्रिया के इस संघर्ष और जमीन से आसमान तक पहुंचने की बेहद प्रेरणादायक इनसाइड स्टोरी।

बचपन के तानों और उपहास को बनाया अपनी सबसे बड़ी ताकत, नहीं मानी हार

प्रिया का जन्म रांची के एक बेहद मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था, जहां बुनियादी सुविधाओं के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ता था। बचपन से ही कपड़ों के रंगों, स्केचिंग और अनूठे डिजाइनों में दिलचस्पी रखने वाली प्रिया ने जब अपने परिवार और आस-पड़ोस के लोगों के सामने एक बड़ी फैशन डिजाइनर बनने की इच्छा जाहिर की, तो किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया। लोगों ने उनकी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए तंज कसे और कहा कि 'यह बड़े लोगों का काम है, तुम्हारे बस की बात नहीं।' लेकिन प्रिया ने इन तानों को अपने दिल से लगाने के बजाय उन्हें अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। उन्होंने ठान लिया था कि वे अपनी पहचान खुद बनाएंगी और लोगों के इन कड़वे शब्दों का जवाब अपनी कामयाबी से देंगी।

स्कॉलरशिप के दम पर पूरी की पढ़ाई, छोटे से कमरे से शुरू किया खुद का बुटीक

प्रिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती फैशन डिजाइनिंग के महंगे कोर्स की फीस भरने की थी। इसके लिए उन्होंने दिन-रात एक करके प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी की और अपनी असाधारण प्रतिभा के बल पर देश के एक प्रतिष्ठित संस्थान में स्कॉलरशिप हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके पास बड़ा शोरूम खोलने के पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने रांची में अपने घर के एक छोटे से कमरे से ही अपनी डिजाइनिंग का काम शुरू किया। शुरुआती दिनों में ग्राहकों को खोजना और उन्हें अपनी कला पर भरोसा दिलाना बेहद मुश्किल था, लेकिन प्रिया ने कपड़ों की क्वालिटी, फिटिंग और उनके अनूठे ट्रेडिशनल-मॉडर्न फ्यूजन लुक से समझौता नहीं किया, जो धीरे-धीरे लोगों की पहली पसंद बनने लगा।

खादी और झारखंड के पारंपरिक सिल्क को दिया इंटरनेशनल लुक, ऐसे बदली किस्मत

प्रिया की सफलता में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्होंने झारखंड के स्थानीय तसर सिल्क, सोहराई आर्ट और खादी के कपड़ों को आधुनिक वेस्टर्न टच देना शुरू किया। उन्होंने पारंपरिक कला को इस खूबसूरती से मॉडर्न आउटफिट्स जैसे गाउन, श्रग्स और कॉर्पोरेट सूट्स में ढाला कि उनका हर एक कलेक्शन अनोखा और बेहद आकर्षक लगने लगा। प्रिया का यह अनोखा विजन सोशल मीडिया के जरिए बड़े-बड़े फैशन ब्लॉगर्स और एनआरआई (NRI) ग्राहकों की नजर में आ गया। इसके बाद उन्हें दिल्ली और मुंबई के बड़े फैशन वीक्स में अपने डिजाइन्स को शोकेस करने का मौका मिला, जहां से उनके काम को एक नई और बड़ी पहचान मिली।

अब अमेरिका और सिंगापुर के बड़े स्टोर्स से आ रहे हैं लाखों के ऑर्डर्स

आज रांची की इस बेटी का छोटा सा स्टार्टअप एक बड़े इंटरनेशनल ब्रांड का रूप ले चुका है। प्रिया के डिजाइन किए हुए कपड़ों की मांग अब सात समंदर पार तक पहुंच गई है। विशेषकर अमेरिका (USA) और सिंगापुर में रहने वाले भारतीय मूल के लोग और वहां के स्थानीय निवासी उनके एथनिक और फ्यूजन कलेक्शंस के दीवाने हो चुके हैं। ऑनलाइन वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए प्रिया को विदेशों से लगातार बड़े-बड़े कस्टमाइज्ड ऑर्डर्स मिल रहे हैं, जिससे न केवल उनकी आय में बंपर इजाफा हुआ है बल्कि वे रांची में कई अन्य स्थानीय महिलाओं और बुनकरों को रोजगार भी दे रही हैं। प्रिया की यह जादुई सफलता आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, आपके सपने हमेशा सच हो सकते हैं।

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