अब संविदा सेवा भी होगी पेंशन योग्य, रांची हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सुन झूम उठे 5000 पारा शिक्षक

अब संविदा सेवा भी होगी पेंशन योग्य, रांची हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सुन झूम उठे 5000 पारा शिक्षक

झारखंड के शिक्षा जगत और संविदा कर्मियों के लिए न्याय के गलियारे से एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। रांची हाईकोर्ट ने एक बड़ा और युगांतकारी फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि संविदा पर की गई सेवा अवधि को भी अब पेंशन के दायरे में लाया जाएगा। अदालत के इस एक फैसले ने सालों से कम मानदेय और असुरक्षित भविष्य की चिंता में डूबे हजारों कर्मचारियों की तकदीर बदल दी है। इस ऐतिहासिक आदेश के आते ही विशेष रूप से झारखंड के 5000 से अधिक पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) में खुशी की लहर दौड़ गई है और लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मना रहे हैं।

रांची हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

माननीय हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के पक्ष को बेहद मजबूत माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर दी गई सेवा को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इन कर्मचारियों ने अपने जीवन के सुनहरे साल राज्य की सेवा में लगाए हैं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह संविदा सेवा काल की गणना करते हुए इसे पेंशन योग्य बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए। यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी नजीर बनेगा जो सालों से स्थायीकरण और बुढ़ापे की लाठी यानी पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे थे।

5000 पारा शिक्षकों के परिवारों में छा गई खुशियां

इस फैसले का सबसे बड़ा और सीधा लाभ झारखंड के उन 5000 पारा शिक्षकों को मिलने जा रहा है, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा शर्तों को लेकर लंबे समय से पेंच फंसा हुआ था। अब तक संविदा कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी तरह की वित्तीय सुरक्षा नहीं मिलती थी, लेकिन हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब उन्हें बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिल गया है। शिक्षक संगठनों ने इसे सत्य और धैर्य की जीत बताया है और कहा है कि इस फैसले से उनके सालों के संघर्ष को सम्मान मिला है।

राज्य में अन्य संविदा कर्मियों के लिए भी खुले रास्ते

रांची हाईकोर्ट के इस रुख के बाद न सिर्फ शिक्षा विभाग बल्कि झारखंड सरकार के अन्य विभागों में कार्यरत संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में भी एक नई उम्मीद जग गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले को आधार बनाकर आने वाले समय में अन्य विभागों के कर्मचारी भी अपने हक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। ऐसे में अब राज्य सरकार और प्रशासनिक अमले पर नियमों में बदलाव करने और इसका वित्तीय खाका तैयार करने का बड़ा दबाव बन गया है, जिसकी सुगबुगाहट रांची के प्रशासनिक गलियारों में शुरू हो चुकी है।

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