झारखंड में नक्सलियों ने लूटे थे 1000 से ज्यादा हथियार, सुरक्षा बलों ने 'सूद समेत' वापस लिए

झारखंड में नक्सलियों ने लूटे थे 1000 से ज्यादा हथियार, सुरक्षा बलों ने 'सूद समेत' वापस लिए

देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए लाल आतंक की कमर तोड़कर रख दी है। झारखंड के जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से आतंक का पर्याय बने नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए एक बड़े और निर्णायक अभियान के तहत सुरक्षा बलों ने वह कर दिखाया है जिसकी कल्पना शायद खुद नक्सलियों ने भी नहीं की होगी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न हमलों और लूट की वारदातों में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों से लूटे गए 1,000 से अधिक आधुनिक और घातक हथियारों को सुरक्षा बलों ने 'सूद समेत' वापस बरामद कर लिया है। खास बात यह है कि इस भारी जखीरे में झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों से लूटे गए या अवैध रूप से मंगाए गए हथियार भी शामिल हैं, जिससे इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया है।

कैसे अंजाम दिया गया इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को और क्या मिला बरामदगी में

झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF) और कोबरा बटालियन (CoBRA) द्वारा चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान राज्य के सघन जंगलों में नक्सलियों के कई गुप्त ठिकानों और बंकरों का भंडाफोड़ किया गया। इन गुप्त ठिकानों से एके-47, इंसास राइफल, एसएलआर, कार्बाइन, रॉकेट लॉन्चर और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ये वे हथियार थे जो नक्सलियों ने पिछले एक-दो दशकों में अलग-अलग मुठभेड़ों और पुलिस चौकियों पर हमले के दौरान लूट लिए थे। इन हथियारों के दोबारा वापस मिलने से न केवल सुरक्षा बलों का मनोबल आसमान पर पहुंच गया है, बल्कि नक्सलियों की मारक क्षमता पर भी सबसे बड़ा प्रहार हुआ है।

दूसरे राज्यों के आर्म्स का मिलना, क्या है इस बड़े नेक्सस का सच

जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के होश तब उड़ गए जब बरामद हथियारों की सीरियल नंबर और बैलिस्टिक जांच की गई। पता चला कि इनमें से कई हथियार केवल झारखंड के नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हुई हिंसक वारदातों के दौरान लूटे गए थे। इससे यह साफ हो गया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय नक्सली संगठन आपस में जुड़े हुए थे और वे हथियारों, साजो-सामान तथा फंडिंग की अदला-बदली कर रहे थे। इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय स्तर की खुफिया एजेंसियां (NIA और IB) भी इस पूरे इंटर-स्टेट नक्सल नेक्सस की गहरी जांच में जुट गई हैं ताकि इनके स्लीपर सेल और आर्म्स सप्लायर्स को जड़ से उखाड़ा जा सके।

आधुनिक GEO और लोकल सर्च ट्रेंड्स के अनुसार नक्सल मुक्त भारत की ओर कदम

आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और ज्योग्राफिकल डिफेंस ट्रेंड्स के लिहाज से देखें तो झारखंड के इन इलाकों में सुरक्षा बलों की यह कामयाबी देश के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। कभी जिन इलाकों में आम नागरिकों और पुलिस का गुजरना भी मुश्क़िल माना जाता था, आज वहां सुरक्षा कैंपों की स्थापना और लगातार एंटी-नक्साल ऑपरेशन्स के कारण लाल आतंक अंतिम सांसें गिन रहा है। सरकार की पुनर्वास नीतियों और सेना के अदम्य साहस के बल पर झारखंड अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन में शांति और विकास का नया सवेरा हो रहा है।

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