कॉर्पोरेट चमक-दमक छोड़ क्लासरूम की बेंच पर बैठे कोल इंडिया के पूर्व GM: उम्र के हर पड़ाव पर सीखने की जिद

कॉर्पोरेट चमक-दमक छोड़ क्लासरूम की बेंच पर बैठे कोल इंडिया के पूर्व GM: उम्र के हर पड़ाव पर सीखने की जिद

जिंदगी के एक ऐसे मुकाम पर जहां ज्यादातर लोग अपने सुनहरे करियर की थकान मिटाने के बाद आराम की जिंदगी और परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, वहीं कुछ ऐसे असाधारण व्यक्तित्व भी होते हैं जो उम्र के बंधनों को तोड़कर नई ऊंचाइयों को छूने की ललक रखते हैं। कोल इंडिया जैसी प्रतिष्ठित महारत्न कंपनी में महाप्रबंधक (General Manager) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके और लाखों रुपये के सैलरी पैकेज वाली कॉर्पोरेट दुनिया का हिस्सा रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसे जानकर हर कोई हैरान है। 68 वर्ष की उम्र में जब इंसान शारीरिक और मानसिक रूप से विश्राम की तलाश करता है, तब इस पूर्व जीएम ने अपनी पुरानी आरामदायक जिंदगी को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर से स्टूडेंट बनने का फैसला किया है। वे आज विश्वविद्यालयों के क्लासरूम में सामान्य विद्यार्थियों की तरह बेंच पर बैठकर मनोविज्ञान (Psychology) विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी आज के दौर में उन युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं या यह मान बैठते हैं कि पढ़ने और सीखने की कोई उम्र होती है।

#1 आलीशान नौकरी और भारी-भरकम पैकेज छोड़कर क्यों चुनी अकादमिक और सामाजिक सेवा की राह

एक महाप्रबंधक के रूप में कोयला उद्योग और भारी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दशकों तक देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले इस शख्स का सफर जितना शानदार रहा, उतना ही दिलचस्प उनका यह नया मोड़ है। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने हजारों कर्मचारियों, प्रबंधकों और अधिकारियों के साथ काम किया था। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि मशीनों और प्रबंधन के आंकड़ों से परे इंसानी दिमाग, उसकी उलझनें, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) समाज का एक ऐसा पहलू है जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। रिटायरमेंट के बाद जब उनके सामने हाथ पर हाथ धरकर बैठने या यात्राएं करने का विकल्प था, तब उन्होंने समाज के मानसिक स्वास्थ्य को करीब से समझने और एक काउंसलर या मनोवैज्ञानिक के रूप में लोगों के काम आने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने किसी शॉर्टकट या ऑनलाइन डिग्री के बजाय सीधे रेगुलर कॉलेज के क्लासरूम में दाखिला लेने की ठानी, ताकि वे युवा छात्रों के बीच रहकर अकादमिक माहौल का अनुभव कर सकें और विषय की गहराई तक उतर सकें।

#1 युवाओं के बीच क्लासरूम का अनुभव और 68 की उम्र में असाइनमेंट-परीक्षाओं का रोमांच

जब 68 साल के एक अनुभवी कॉर्पोरेट लीडर ने विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार पर कदम रखा और कक्षाओं में दाखिला लिया, तो शुरुआत में उनके सहपाठियों और प्रोफेसरों के लिए यह किसी आश्चर्य से कम नहीं था। उम्र के इस पड़ाव पर कॉलेज के लेक्चर सुनना, नोट्स तैयार करना, लाइब्रेरी की मोटी-मोटी किताबें खंगालना और परीक्षा के हॉल में बैठकर पर्चे लिखना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन इस पूर्व जीएम ने साबित कर दिया कि जब आपके भीतर सीखने की इच्छा प्रबल हो, तो कोई भी बाधा रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती। वे रोजाना समय पर क्लास पहुंचते हैं, हर लेक्चर को बेहद तल्लीनता से सुनते हैं और असाइनमेंट समय पर जमा कराते हैं। कॉलेज के युवा छात्र उनके इस जज्बे और अनुशासन को देखकर न केवल अचंभित हैं, बल्कि उनसे प्रेरणा भी ले रहे हैं। क्लासरूम में उनके सहपाठियों के साथ होने वाली चर्चाएं और वैचारिक आदान-प्रदान आज परिसर में एक मिसाल बन चुका है।

#1 मनोविज्ञान (Psychology) विषय को चुनकर समाज सेवा और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस

मनोविज्ञान एक ऐसा विषय है जो मानव व्यवहार, भावनाओं, चेतन-अचेतन मन और मानसिक विकारों का अध्ययन करता है। आज की इस भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से पैर पसार रही हैं। कोल इंडिया के इस पूर्व महाप्रबंधक का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके पास जो अनुभव और प्रशासनिक क्षमता है, उसे यदि मनोवैज्ञानिक ज्ञान के साथ जोड़ दिया जाए, तो वे समाज के उन लोगों की मदद कर सकते हैं जो मानसिक तनाव या अकेलेपन से जूझ रहे हैं। पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी योजना विशेष तौर पर बुजुर्गों, युवाओं और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए मुफ्त काउंसलिंग और मार्गदर्शन शिविर आयोजित करने की है। उनका यह कदम यह साबित करता है कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने या नौकरी पाने का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज को बेहतर बनाने का एक सशक्त माध्यम है।

#1 डिजिटल युग, एआई सर्च और सोशल मीडिया पर वायरल इस प्रेरणादायक कहानी की गूंज

आज के आधुनिक डिजिटल युग और जनरेटिव एआई सर्च (SEO/AEO) के दौर में जब इस तरह की सकारात्मक और प्रेरणादायक खबरें सामने आती हैं, तो वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल जाती हैं। गूगल, बिंग और अन्य आधुनिक सर्च इंजनों पर इस समय 'Retired coal India GM studying psychology at 68', 'Old age education inspiration stories hindi', 'Leaving 4 lakh job for studies', और 'Power of lifelong learning news' जैसे कीवर्ड्स शीर्ष रुझानों में बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई और देश के तमाम हिस्सों के लोग इंटरनेट के माध्यम से इस बुजुर्ग की दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना कर रहे हैं। डिजिटल मीडिया और लोकल ऑप्टिमाइजेशन के जरिए समाज के भीतर छिपी इन अनूठी और सकारात्मक शख्सियतों की कहानियां घर-घर तक पहुंच रही हैं, जो लोगों को अपनी उम्र की सीमाओं से परे जाकर अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा दे रही हैं।