JSSC CGL Exam Paper Leak: झारखंड में एसआईटी का बड़ा एक्शन, परीक्षा पास करने वाले 4 नए अभ्यर्थी गिरफ्तार
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में बहुचर्चित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तर प्रारंभिक व मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा यानी सीजीएल (JSSC CGL) में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के मामलों की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग की विशेष जांच टीम यानी सीआईडी की एसआईटी ने अपनी कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है। जांच एजेंसी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए उस परीक्षा में खुद सफल होने वाले और मेरिट लिस्ट में जगह बनाने वाले चार संदिग्ध अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन चारों की गिरफ्तारी के बाद से झारखंड के प्रशासनिक हलकों और छात्र संगठनों के बीच हड़कंप मच गया है, क्योंकि जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा पास करके नौकरी पाने का सपना देखा था, वे ही अब इस बड़े फर्जीवाड़े के जाल में सीधे फंसते नजर आ रहे हैं। सीआईडी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि एजेंसी इस परीक्षा के दौरान रची गई साजिश की जड़ तक पहुंचने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है।
सीआईडी की एसआईटी द्वारा की गई इस ताज़ा और अहम कार्रवाई में पकड़े गए चारों सफल अभ्यर्थियों की पहचान स्पष्ट कर दी गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दीपक कुमार, विजय कुमार तिवारी और आनंद कुमार सिंह शामिल हैं, जो मुख्य रूप से झारखंड के धनबाद जिले के रहने वाले हैं, जबकि चौथा आरोपी उमेश कुमार राय है जो फिलहाल बोकारो जिले में रहकर अपनी गतिविधियां चला रहा था। इन सभी को सीआईडी की विशेष टीम ने लंबी पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दबोचा है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इन अभ्यर्थियों ने अपनी मेहनत के दम पर नहीं, बल्कि सॉल्वर गैंग और परीक्षा माफियाओं की मिलीभगत से इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास किया था। पुलिस अब इनसे यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इन्होंने पेपर लीक गिरोह तक पहुंच कैसे बनाई और इसके लिए बिचौलियों को कितनी भारी-भरकम रकम पहुंचाई गई थी।
झारखंड में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का इतिहास शुरू से ही विवादों और अनियमितताओं के साए में घिरा रहा है। परीक्षा संपन्न होने के बाद से ही लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही लीक हो गए थे और कुछ खास लोगों को अवैध तरीके से इसके उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। बढ़ते हंगामे और छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी झारखंड पुलिस के विशेष अनुसंधान विभाग यानी सीआईडी की एसआईटी को सौंपी गई थी। टीम ने जब इस मामले से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल फुटप्रिंट्स और परीक्षा केंद्रों के रिकॉर्ड को खंगालना शुरू किया, तो कई चौंकाने वाली परतें उधड़ती चली गईं। जांच के दौरान यह बात पुख्ता तौर पर सामने आई कि इस परीक्षा के संचालन में शामिल कुछ बड़ी एजेंसियों और उनके नुमाइंदों ने अंदरखाने से पूरी व्यवस्था को एक सिंडिकेट की तरह बेच दिया था।
इस बड़े रैकेट की कड़ियां तलाशते हुए सीआईडी ने इससे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां की हैं, जिसने इस घोटाले के दायरे को राष्ट्रीय स्तर तक फैला दिया है। हाल ही में सीआईडी ने परीक्षा संचालन से जुड़े सोमांश प्रकाश और उसके करीबी सहयोगी राहुल कुमार को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में यह खुलासा हुआ था कि कोलकाता की जिस एजेंसी को परीक्षा कराने का जिम्मा मिला था, उसने नियमों को ताक पर रखकर अपने अधिकार किसी अन्य फर्म को सबलेट कर दिए थे। इसके अलावा, मुख्य आरोपी के तौर पर पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके अभय तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी के तार भी इसी नेटवर्क से जुड़े हुए पाए गए थे। इन तमाम कड़ियों को आपस में जोड़ने के बाद ही सीआईडी उस सिंडिकेट तक पहुंचने में कामयाब हुई, जिसके जरिए अयोग्य अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल बनाकर अधिकारी की कुर्सी तक पहुंचाने का पूरा खेल रचा जा रहा था।
सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में इस तरह की सेंधमारी से न केवल आम और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर भी बहुत बड़ा सवालिया निशान लग जाता है। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने के सरकारी फैसलों और उसके बाद अदालतों में चले कानूनी दांव-पेच के बीच सीआईडी की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। जिन सफल अभ्यर्थियों को अपनी सफलता पर गर्व था, वे अब सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं और उनकी डिग्रियां तथा नौकरियां दोनों खतरे में पड़ गई हैं। एसआईटी अब इन चारों आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की जुगत में है कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है और झारखंड के अलावा अन्य किन-किन राज्यों तक इस पेपर लीक गिरोह के तार फैले हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे कई और बड़े चेहरों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।