रांची में जेपीएससी-जेएसएससी छात्रों का फूटा गुस्सा: विरोध प्रदर्शन के दौरान लेफ्ट नेता नेहा बोरा पर फेंकी स्याही, मची अफरा-तफरी
झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों छात्रों का आक्रोश चरम पर पहुंच चुका है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही देरी और कथित धांधलियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं ने अपना कड़ा रुख दिखाना शुरू कर दिया है। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे रांची के आक्रोशित छात्रों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान एक चौंकाने वाली घटना को अंजाम दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस वक्त पूरी तरह से बेकाबू हो गई जब गुस्साए छात्रों ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी लेफ्ट नेता नेहा बोरा पर अचानक स्याही फेंक दी। इस अप्रत्याशित घटना के बाद से मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई और पुलिस प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए।
क्यों भड़के हुए हैं रांची के छात्र और क्या है पूरे विवाद की असल वजह?
पिछले कई महीनों से झारखंड के युवा और छात्र संगठन जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं की पेंडिंग प्रक्रियाओं, रिजल्ट में देरी और पेपर लीक जैसी समस्याओं को लेकर लगातार मुखर बने हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि राजनीतिक दल और छात्र संगठन सिर्फ अपने निजी या राजनीतिक फायदे के लिए उनके आंदोलन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसी नाराजगी के चलते जब वामपंथी नेता नेहा बोरा छात्रों के बीच अपनी बात रखने पहुंचीं, तो वहां मौजूद आक्रोशित छात्रों का सब्र टूट गया और उन्होंने विरोध जताते हुए उन पर स्याही फेंक दी, जिससे यह साफ हो गया कि छात्र अब किसी भी नेता या दल के बहकावे में आने को तैयार नहीं हैं।
स्थानीय राजनीति और आगामी चुनावों पर कितना गहरा असर छोड़ेगा यह छात्र आंदोलन?
रांची में हुई इस घटना ने झारखंड की सियासत में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहां तमाम विपक्षी और वामपंथी दल छात्रों के कंधे पर रखकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम छात्रों का यह आक्रामक रुख यह बता रहा है कि वे अपनी लड़ाई खुद लड़ने के लिए सक्षम हैं। इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है ताकि किसी भी तरह की बड़ी हिंसा या कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटा जा सके। प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर झारखंड के युवाओं का यह गुस्सा आने वाले समय में राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, जिस पर हर किसी की पैनी नजर बनी हुई है।