झारखंड: नाबालिग लड़की से मिलने पहुंचे दो युवकों को ग्रामीणों ने पकड़ा
देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर कानून को अपने हाथ में लेने और भीड़ द्वारा सजा देने (Mob Justice) की डरावनी तस्वीरें सामने आती रहती हैं, जो समाज की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। ताजा मामला झारखंड के कोडरमा (Koderma) जिले से सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की से मिलने पहुंचे दो युवकों को स्थानीय ग्रामीणों ने रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने न सिर्फ दोनों युवकों के साथ बदसलूकी की, बल्कि उन्हें पूरे गांव में जुलूस की तरह घुमाया और फिर एक बिजली के खंभे से बांधकर तालिबानी शैली में सजा दी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय पुलिस प्रशासन के सामने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया संकट खड़ा हो गया है। आइए इस पूरे संवेदनशील मामले की गहराई से पड़ताल करते हैं और जानते हैं कि आखिर कोडरमा के इस गांव में कानून को दरकिनार कर भीड़ ने किस प्रकार खौफनाक फैसला सुनाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोडरमा जिले के एक स्थानीय गांव में कुछ दिनों से दो युवक किसी नाबालिग लड़की से मिलने के लिए चुपचाप आ रहे थे। घटना वाले दिन जब दोनों युवक एक बार फिर उस लड़की से मिलने पहुंचे, तो गांव के कुछ लोगों की नजर उन पर पड़ गई। शक के आधार पर जब ग्रामीणों ने उनसे पूछताछ शुरू की तो माहौल गर्मा गया। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और स्थिति बेकाबू हो गई। भीड़ ने बिना किसी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई का इंतजार किए खुद ही न्यायाधीश की भूमिका निभाते हुए दोनों युवकों को पकड़ लिया। प्रेम प्रसंग या अन्य किसी संदिग्ध मिलने की आशंका को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने कानून के सारे दायरे को ताक पर रख दिया और अपनी ही अदालत सजा सुना दी।
मामले की सबसे डरावनी तस्वीर तब सामने आई जब भीड़ ने पकड़े गए दोनों युवकों को सबक सिखाने के नाम पर अमानवीयता की सभी हदें पार कर दीं। ग्रामीणों ने दोनों युवकों को पकड़कर पूरे गांव की गलियों में जुलूस की तरह घुमाया। इस दौरान तमाशबीन बने लोग और कई लोग मोबाइल से वीडियो बनाते हुए नजर आए, लेकिन किसी ने भी उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं जुटाई। इसके बाद दोनों युवकों को एक बिजली के खंभे या पोल से कसकर बांध दिया गया। खंभे से बांधने के बाद उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें घंटों प्रताड़ित किया जाता रहा। इस प्रकार की घटनाएं समाज में बढ़ती असहिष्णुता और कानून के प्रति अविश्वास को साफ दर्शाती हैं, जहां लोग खुद ही पुलिस और जज बन जाते हैं।
इस पूरी अमानवीय घटना का किसी ने चुपके से वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर वायरल कर दिया। वीडियो के वायरल होते ही कोडरमा पुलिस प्रशासन के होश उड़ गए और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय थाना की पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर दोनों युवकों को भीड़ के चंगुल से मुक्त कराया। पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए मुख्य आरोपियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है, चाहे मामला कितना भी संवेदनशील क्यों न हो, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कोडरमा की यह घटना एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि हमारे समाज में कानून के शासन का डर लगातार कम होता जा रहा है और लोग त्वरित न्याय के नाम पर हिंसक भीड़तंत्र (Mob Lynching & Justice) का हिस्सा बनते जा रहे हैं। नाबालिक से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि नागरिक खुद कानून हाथ में लेकर किसी की जान जोखिम में डाल दें या अमानवीयता की हदें पार कर दें। इस तरह की घटनाएं समाज के ताने-बाने को अंदर से खोखला कर रही हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन और स्थानीय पुलिस ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए ताकि भविष्य में कोई भी भीड़ इस तरह कानून की धज्जियां उड़ाने की हिम्मत न कर सके।