अहम साक्ष्य जुटाने में लाचारी पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, 4 नवंबर को एसपी तलब
राजधानी रांची के चर्चित डीजे संदीप प्रामाणिक हत्याकांड (Sandeep Pramanik Murder Case) मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस अनुसंधान की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान अहम साक्ष्य और कड़ियां जुटाने में बरती गई लापरवाही पर तीखी टिप्पणी करते हुए संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को आगामी 4 नवंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का सख्त आदेश दिया है। इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले में अदालत की सख्ती के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, और एक बार फिर से इस पूरे प्रकरण की जांच और कानूनी कार्रवाई पर सियासी व कानूनी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील और हाईकोर्ट की समीक्षा प्रक्रिया
मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले और रांची के एक लोकप्रिय बार में डीजे संचालक के रूप में काम करने वाले संदीप प्रामाणिक की हत्या के मामले में निचली अदालत ने पूर्व में फैसला सुनाया था। निचली अदालत द्वारा कुछ आरोपियों को सजा सुनाए जाने और अन्य पहलुओं को लेकर दोषियों द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में अपील याचिका दायर की गई है। जब हाईकोर्ट की खंडपीठ इस मामले की फाइल और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की समीक्षा कर रही थी, तब अदालत की नजर पुलिस अनुसंधान (Investigation) के दौरान छूटी महत्वपूर्ण कमियों और कमजोर साक्ष्यों पर पड़ी। अदालत का मानना है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में साक्ष्यों का इस तरह कमजोर रहना न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
पुलिस अनुसंधान की कमियों पर अदालत का कड़ा रुख, तय तारीख पर पेशी का निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि इस सनसनीखेज वारदात की तह तक जाने के लिए जिस वैज्ञानिक और पुख्ता साक्ष्य संकलन की आवश्यकता थी, उसमें अनुसंधानकर्ताओं स्तर पर गंभीर चूकें की गई हैं। गवाहों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों के बीच की कड़ियों के टूटने पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर एक पहलू की सटीक जांच जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने संबंधित एसपी को तलब किया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शुरुआती तफ्तीश के दौरान किन कारणों से महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया गया।
न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित परिवार की नजरें अब उच्च न्यायालय के अगले कदम पर
इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर मृतक संदीप प्रामाणिक के परिजनों को न्याय मिलने की आस और अधिक गहरी हो गई है। परिवार और आम जनता की निगाहें अब 4 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत के समक्ष पुलिस प्रशासन को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। विधिक जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से राज्यभर की पुलिस एजेंसियों को यह कड़ा संदेश मिला है कि आपराधिक मामलों की जांच में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और अदालतें न्याय के हित में हर बारीक बिंदु की गहराई से समीक्षा करेंगी।