तानाशाही और वोट काटने के दावों के खिलाफ झारखंड कांग्रेस का सीधा प्रहार
देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर करारा हमला किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि "विनाश की घंटी बज चुकी है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हर हाल में इस्तीफा देना होगा"। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) और वोट काटे जाने के आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन दर्ज करा रहा है।
दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजामों और दमनकारी नीतियों पर केशव महतो का बड़ा हमला
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए किए गए प्रशासनिक उपायों पर सवाल उठाते हुए केशव महतो कमलेश ने केंद्र सरकार की नीयत पर गंभीर शंका जताई। उन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वारों को अचानक बंद कर देना, दूसरे राज्यों से आने वाली पैसेंजर ट्रेनों के आवागमन को प्रभावित करना, हवाई जहाजों के किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी करना और पड़ोसी राज्यों से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर देना साफ दर्शाता है कि सरकार बुरी तरह डरी हुई है। "सांच को आंच क्या?" का नारा देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने वास्तव में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराए होते, तो आज सरकार को विरोध दबाने के लिए इतनी बड़ी ताकेदारी और नाकेबंदी करने की जरूरत नहीं पड़ती।
हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र तक 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का सनसनीखेज दावा
केशव महतो कमलेश ने चुनाव आयोग की प्रणाली और प्रक्रियाओं पर उंगली उठाते हुए आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदाता सूची के संशोधन (SIR) का जो काम पात्र नागरिकों के वोट जोड़ने के लिए किया जाना चाहिए था, उसका दुरुपयोग वैध मतदाताओं के नाम छांटने और हटाने में किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, सुनियोजित साजिश के तहत पूरे देश में लगभग 13 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा सड़क से लेकर संसद तक उठाए गए वोट चोरी और फर्जीवाड़े के सबूतों का हवाला देते हुए कहा कि यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार जनता के आक्रोश से घबराई हुई है।
पूरे झारखंड में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे को लेकर आंदोलन तेज
झारखंड में भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध की लहर और तेज हो गई है। रांची से लेकर लोहरदगा तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले कपड़े पहनकर और तख्तियां हाथों में लेकर 'ब्लैक डे' मनाया और जिला मुख्यालयों पर जमकर प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि लोकतंत्र की आत्मा उसके नागरिकों के मताधिकार में बसती है, और जब चुनाव कराने वाली सर्वोच्च संस्था पर ही पक्षपात का आरोप लगे, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता। झारखंड कांग्रेस ने ऐलान किया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और मतदाता सूची से हटाए गए सभी वैध नामों की स्वतंत्र जांच कराकर उन्हें दोबारा नहीं जोड़ा जाता, तब तक उनका यह जनांदोलन रुकने वाला नहीं है।
क्या लोकतांत्रिक दबाव के आगे झुकेगी सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली?
केशव महतो कमलेश के इस आक्रामक रुख और विपक्षी दलों के एकजुट होते तेवरों ने केंद्र सरकार के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस इसे 'लोकतंत्र की रक्षा' और 'वोट का अधिकार बचाने' की लड़ाई बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष इन आरोपों को बेबुनियाद और चुनाव में हार की पूर्व-भूमिका करार दे रहा है। बहरहाल, झारखंड से उठी यह विरोध की आवाज आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आकार ले सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग इन संगीन दावों और इस्तीफे की मांगों पर क्या आधिकारिक सफाई देता है और आने वाले दिनों में यह सियासी संग्राम कौन सा नया मोड़ लेता है।