झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में किस प्रकार मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी और दही हांडी का यह महाउत्सव
देशभर में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व इस साल बेहद उत्साह, उमंग और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, और इसी कड़ी में झारखंड की राजधानी रांची का ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान अखाड़े और आस्था के अद्भुत संगम में तब्दील हो गया है। रांची के इस प्रसिद्ध मैदान में आयोजित होने वाली भव्य दही हांडी प्रतियोगिता और सांस्कृतिक महोत्सव का उद्घाटन करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे, जिन्होंने पूरे विधि-विधान और पारंपरिक अंदाज में इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री के मैदान में पहुंचते ही हजारों की संख्या में मौजूद गोबिंदा टोलियों, युवाओं और श्रद्धालुओं ने 'जय श्रीकृष्ण' और 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के गगनभेदी नारों के साथ उनका और इस पावन पर्व का स्वागत किया। पूरा मोरहाबादी मैदान रंग-बिरंगे झंडों, भगवान कृष्ण के चित्रों और भव्य मंच सजावट से दुल्हन की तरह सजा हुआ नजर आ रहा था, जहाँ राज्यभर से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य और गायन प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। इस तरह के सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों से न केवल आपसी भाईचारा और सांस्कृतिक धरोहर मजबूत होती है, बल्कि त्योहारों का असली आनंद भी जनता के बीच खुलकर सामने आता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दही हांडी के इस पारंपरिक मंच से युवाओं और जनता को क्या मुख्य संदेश दिया?
दही हांडी प्रतियोगिता के इस विशाल मंच का दीप प्रज्वलित कर और पूजा-अर्चना करके शुभारंभ करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और उनके उपदेशों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान कृष्ण ने हमेशा अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने, समाज को एकजुट रखने और धर्म की स्थापना करने का जो मार्ग दिखाया है, वह आज के आधुनिक समाज के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है जितना कि द्वापर युग में था। उन्होंने झारखंड की पावन माटी और यहाँ की सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार राज्य की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक पर्व-त्योहारों और लोक कलाओं को जीवित रखने के लिए हमेशा पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करती रही है। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दही हांडी जैसे खेल हमें यह सिखाते हैं कि चाहे कितनी भी ऊंची मंजिल क्यों न हो और रास्ते में कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं, अगर आपसी सहयोग, समन्वय और अटूट टीम वर्क हो तो किसी भी कठिनाई पर आसानी से विजय प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री के इस प्रेरणादायी संबोधन के बाद युवाओं में एक नया जोश और उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपनी सहमति प्रकट की।
मोरहाबादी मैदान में सजी दही हांडी प्रतियोगिता का रोमांच और गोबिंदा टोलियों के बीच मची होड़ का नजारा कैसा था?
मोरहाबादी मैदान में आयोजित इस वर्ष की दही हांडी प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण वह रोमांचक पल था जब हवा में कई फीट ऊपर लटकी मक्खन से भरी मटकी को फोड़ने के लिए झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से आई गोबिंदा टोलियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा शुरू हुई। जमीन से कई फीट की ऊंचाई पर बांधी गई इस हांडी को हासिल करने के लिए युवाओं ने एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर इंसानी मीनारें (पिरामिड) बनानी शुरू कीं, जिसे देखकर मैदान में मौजूद हर दर्शक की सांसें कुछ पलों के लिए थम गईं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच जब एक टीम के गोविंदाओं ने लगातार गिरते और संभलते हुए अंततः पूरी फुर्ती और संतुलन के साथ उस मटकी को सफलतापूर्वक फोड़ दिया, तो पूरा मोरहाबादी मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और सीटियों की आवाज से गूंज उठा। इस रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले को देखने के लिए रांची शहर के कोने-कोने से हजारों की संख्या में आम नागरिक, महिलाएं और बच्चे अपने परिवारों के साथ मैदान में पहुंचे थे, जिन्होंने इस पारंपरिक खेल का खुलकर आनंद लिया। विजेता टीम को मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों भारी-भरकम नकद पुरस्कार और पारंपरिक स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, जिसके बाद जीत की खुशी में युवाओं ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर और नाचते-गाते हुए उत्सव मनाया।
इस भव्य आयोजन ने झारखंड की सांस्कृतिक एकता, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर क्या संदेश दिया?
इतने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले इस जन-उत्सव को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए रांची जिला प्रशासन, पुलिस बल और आयोजन समिति ने महीनों पहले से अपनी कमर कस रखी थी। मोरहाबादी मैदान के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल के जवानों की तैनाती की गई थी, सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही थी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीमें भी पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात थीं। सुरक्षा के इन चाक-चौबंद इंतजामों के चलते ही बिना किसी व्यवधान के यह पूरा कार्यक्रम बेहद अनुशासन और हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हो गया, जिसकी सराहना स्थानीय नागरिकों ने भी खुलकर की। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो जन्माष्टमी और दही हांडी जैसे पर्व जब इस तरह सामूहिक रूप से मनाए जाते हैं, तो वे समाज के सभी वर्गों—चाहे वे किसी भी जाति, धर्म या पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हों—को एक सूत्र में पिरोने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री की इस आयोजन में प्रत्यक्ष उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि सरकार जनता के सुख-दुख और उनके सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाने में हमेशा आगे रहती है, जिससे जनता और शासन के बीच का यह जुड़ाव राज्य की सामाजिक समरसता को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करता है।