बिजली परियोजना में काम करने काठमांडू गए थे, सदमे में डूबा परिवार; वतन वापसी और मदद के लिए लगाई गुहार

बिजली परियोजना में काम करने काठमांडू गए थे, सदमे में डूबा परिवार; वतन वापसी और मदद के लिए लगाई गुहार

कुदरत का कहर जब अपने विकराल रूप में सामने आता है, तो इंसान की बसाई हुई दुनिया पलभर में खंडहर में तब्दील हो जाती है। पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण और खौफनाक बाढ़ और लैंडस्लाइड (Landslide) की प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें सैकड़ों लोगों के हताहत होने और हजारों के बेघर होने की दर्दनाक खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली खबर प्रकाश में आई है, जिसने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है। रांची के रहने वाले रामप्रसाद नामक एक आम श्रमिक, जो अपनी आजीविका चलाने और परिवार का पेट भरने के लिए काठमांडू के पास किसी पनबिजली परियोजना (Hydroelectric Project) में मजदूरी करने गए थे, इस भयंकर बाढ़ की चपेट में आने के बाद से पूरी तरह लापता बताए जा रहे हैं। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो उनके घर-परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो चुका है और उन्होंने झारखंड सरकार तथा भारत सरकार से अपने बेटे को सुरक्षित वापस लाने या उसकी तलाश के लिए तुरंत मदद की गुहार लगाई है।

रामप्रसाद का नेपाल जाने का सफर और रोजी-रोटी की मजबूरी

किसी भी साधारण परिवार के मुखिया या युवा के लिए अपने घर-परिवार से दूर दूसरे देश या राज्य में कमाने के लिए जाना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं होता, लेकिन पेट की आग इंसान से सब कुछ करवा देती है। रांची के एक छोटे से ग्रामीण या शहरी परिवार से ताल्लुक रखने वाले रामप्रसाद भी अपने घर की आर्थिक तंगी और बदहाली को दूर करने की उम्मीद में कुछ महीने पहले ही नेपाल गए थे। काठमांडू के समीप चल रही एक बड़ी बिजली परियोजना (हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट) में उन्हें मजदूरी का काम मिला था, जिसके जरिए वे नियमित रूप से अपने परिवार का खर्च चला रहे थे। उनके परिजनों का कहना है कि रामप्रसाद बेहद मेहनती और सीधे स्वभाव के व्यक्ति थे, जो हर हफ्ते अपने घर फोन करके परिवार का हालचाल लिया करते थे। लेकिन नेपाल में अचानक बदले मौसम और आसमान से बरसी आफत के बाद से उनका फोन अचानक बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह से टूट गया, जिससे घर वालों की रातों की नींद उड़ गई।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही का खौफनाक मंजर

पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही के दिनों में मानसून की बेरुखी और लगातार हुई भारी मूसलाधार बारिश के चलते नदियां अपने उफान पर आ गई थीं, जिससे कई इलाकों में भयंकर बाढ़ आ गई और बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ। पर्वतीय इलाकों में पहाड़ों के दरकने और पानी के तेज बहाव ने बड़े-बड़े पुलों, सड़कों और निर्माणाधीन परियोजनाओं को अपनी आगोश में ले लिया। काठमांडू और उसके आसपास के क्षेत्रों में हालात इतने बदतर हो गए थे कि प्रशासन के लिए भी राहत और बचाव कार्य चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। रामप्रसाद जिस बिजली परियोजना स्थल पर काम कर रहे थे, वह इलाका भी इस तबाही के केंद्र के बिल्कुल नजदीक बताया जा रहा है। स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जलप्रलय में कई मजदूर और कर्मचारी या तो पानी के तेज बहाव में बह गए या फिर मलबे के नीचे दब गए, जिससे वहां काम कर रहे अन्य प्रवासी मजदूरों के परिवारों में भी भारी दहशत फैल गई है।

परिजनों का दर्द और शासन-प्रशासन से लगाई गई मदद की गुहार

जैसे ही रांची में रह रहे रामप्रसाद के परिजनों को नेपाल की इस भीषण आपदा और उसमें उनके बेटे के लापता होने की खबर मिली, पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, और हर आने जाने वाले शख्स से वे यहीि गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनके घर का चिराग सुरक्षित वापस लौट आए। परिवार वालों ने झारखंड सरकार के जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा देश के विदेश मंत्रालय (MEA) को पत्र लिखकर यह अपील की है कि नेपाल सरकार और वहां की स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर रामप्रसाद की खोजबीन जल्द से जल्द शुरू की जाए। परिजनों का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है कि रामप्रसाद उस वक्त सुरक्षित स्थान पर जा पाए थे या फिर इस प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गए, और यह अनिश्चितता उनके दिल को अंदर से खोखला कर रही है।

विदेश मंत्रालय और दूतावास की भूमिका की उम्मीद

इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय आपदाओं में जब देश का कोई नागरिक विदेश में लापता हो जाता है, तो केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Nepal) की जिम्मेदारी सबसे अहम हो जाती है। झारखंड के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय से यह मांग की है कि नेपाल में फंसे या लापता हुए भारतीय श्रमिकों की सूची को सार्वजनिक किया जाए और राहत कार्यों में तेजी लाई जाए। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास लगातार नेपाल प्रशासन के संपर्क में है और आपदा प्रभावित क्षेत्रों से लापता लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहा है। रांची के इस परिवार की निगाहें हर वक्त टेलीविजन स्क्रीन और फोन पर टिकी हुई हैं कि कब कोई अधिकारी उन्हें यह शुभ समाचार दे कि रामप्रसाद बिल्कुल सुरक्षित हैं और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला यह हादसा

रामप्रसाद के लापता होने की यह घटना केवल एक परिवार का व्यक्तिगत दुख नहीं है, बल्कि यह उन लाखों प्रवासी मजदूरों की कठोर वास्तविकता को भी बयां करती है जो अपने दो वक्त की रोटी के लिए देश-विदेश की कठिन परिस्थितियों में काम करने को विवश हैं। जब भी कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है, तो सबसे ज्यादा मार इन्हीं गरीबों और कामगारों पर पड़ती है जिनके पास सुरक्षा के पर्याप्त साधन नहीं होते। रांची के इस पीड़ित परिवार के आंसू और उनकी उम्मीदें इस बात की गवाही दे रही हैं कि इंसान के लिए अपनों की सलामती से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। पूरा झारखंड इस समय रामप्रसाद की सुरक्षित वापसी के लिए दुआएं मांग रहा है, और हर किसी की यही प्रार्थना है कि यह परिवार एक बार फिर से अपनी खुशियों को वापस पा सके।

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