किसानों के लिए ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन कराना हुआ अनिवार्य

किसानों के लिए ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन कराना हुआ अनिवार्य

झारखंड के कृषि और अन्नदाता किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है, जो राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था और धान उत्पादक किसानों के चेहरों पर खुशी लाने का काम कर रही है। झारखंड सरकार और खाद्य आपूर्ति विभाग ने आगामी धान खरीद सीजन (Paddy Procurement Season 2026-27) के लिए आधिकारिक तिथियों का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत राज्यभर में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान की खरीदारी आगामी 15 दिसंबर से आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी। सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिलने की पूरी उम्मीद है, ताकि उन्हें बिचौलियों और औने-पौने दामों में अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। हालांकि, इस बार राज्य सरकार ने धान बेचने वाले किसानों के लिए पारदर्शिता बरतते हुए कुछ नए और कड़े नियम लागू किए हैं, जिनमें ई-केवाईसी (e-KYC) और जमीन का भौतिक व ऑनलाइन सत्यापन (Land Verification) कराना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। जब तक किसान इन तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा नहीं करेंगे, तब तक उनका धान सरकारी पैक्स (PACS) या व्यापार मंडलों में नहीं खरीदा जाएगा। आइए आज इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि झारखंड में धान खरीद की यह पूरी प्रक्रिया क्या है और किसानों को किन नियमों का पालन करना होगा।

झारखंड सरकार की धान खरीद योजना और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ

झारखंड में कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए हर साल सरकार पैक्स (Primary Agricultural Credit Society) और व्यापार मंडलों के माध्यम से किसानों से सीधे धान की खरीद करती है। इस वर्ष भी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से धान खरीदा जाएगा, जिसमें सामान्य धान और ग्रेड-ए धान के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खातों (DBT के माध्यम से) में भेजा जाएगा ताकि बिचौलियों या किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न बचे। सरकार का यह प्रयास रहता है कि राज्य का कोई भी वास्तविक किसान अपनी फसल बेचने से वंचित न रह जाए। यही कारण है कि धान खरीद की शुरुआत से कई हफ्ते पहले ही किसानों के पंजीकरण और दस्तावेजों की जांच का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाता है।

ई-केवाईसी (e-KYC) और जमीन का सत्यापन क्यों है जरूरी? जानिए इसके पीछे की मुख्य वजह

पिछले कुछ वर्षों में धान खरीद प्रक्रिया के दौरान कई ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं जिनमें फर्जी किसान या बिचौलिए दूसरों के नाम पर या फर्जी कागजात तैयार करके सरकारी खजाने से एमएसपी का फायदा उठा रहे थे। ऐसे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए ही झारखंड सरकार ने इस बार ई-केवाईसी (e-KYC) और जमीन के कागजातों का ऑनलाइन सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत धान बेचने वाले हर पंजीकृत किसान को अपने आधार कार्ड को मोबाइल नंबर से लिंक कराकर बायोमेट्रिक या ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी करानी होगी। इसके साथ ही, किसान के नाम पर कितनी जमीन है, वह रैयत (खुद की जमीन) है या बटाईदार (लीज पर खेती करने वाला), इसका पूरा रिकॉर्ड अंचल कार्यालय (Circle Office) और राजस्व विभाग के पोर्टल से सत्यापित किया जाएगा। यदि किसी किसान के कागजात में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि, आवश्यक दस्तावेज और जरूरी दिशा-निर्देश

जो भी किसान भाई इस साल झारखंड सरकार को अपना धान बेचना चाहते हैं, उन्हें तय समयसीमा के भीतर खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए किसानों को आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, जमीन की अद्यतन रसीद (Land Receipt), एलपीसी (Land Possession Certificate) और घोषणा पत्र (Self Declaration Form) अपलोड करना अनिवार्य है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने सभी जिलों के पैक्स अध्यक्षों और सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे गांवों में शिविर लगाकर किसानों को ई-केवाईसी और जमीन सत्यापन की प्रक्रिया में पूरी मदद करें ताकि किसी भी अन्नदाता को असुविधा का सामना न करना पड़े। समय रहते अपनी प्रक्रिया पूरी करने वाले किसानों को 15 दिसंबर से शुरू होने वाली खरीद प्रक्रिया में सबसे पहले टोकन जारी किए जाएंगे और वे आसानी से अपना धान बेच सकेंगे।