सीआईएसएफ हवलदार से मांगी थी रिश्वत, गृह मंत्रालय से जुड़े 3 अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार; महकमे में हड़कंप

सीआईएसएफ हवलदार से मांगी थी रिश्वत, गृह मंत्रालय से जुड़े 3 अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार; महकमे में हड़कंप

झारखंड के दो सबसे प्रमुख और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों रांची और धनबाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन ब्रांच ने आधी रात को एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई इस कार्रवाई में सीबीआई की टीम ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक हवलदार से रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय (MHA) से जुड़े तीन उच्च पदस्थ अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इस अचानक हुई छापेमारी से न केवल स्थानीय प्रशासनिक महकमे में बल्कि सुरक्षा बलों और गृह मंत्रालय के संबंधित विभागों में भी भारी हड़कंप मच गया है। सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने रांची और धनबाद के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर रिश्वत की राशि बरामद की और आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सीबीआई की आधी रात की कार्रवाई और घटना का पूरा सच

झारखंड में सरकारी तंत्र और सुरक्षा प्रतिष्ठानों में जारी भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए सीबीआई की यह कार्रवाई एक बड़ी मिसाल मानी जा रही है। धनबाद और रांची में सीबीआई की धनबाद स्थित एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) को काफी समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निचले स्तर के कर्मचारियों और जवानों का शोषण कर रहे हैं। इसी कड़ी में सीआईएसएफ के एक पीड़ित हवलदार ने सीबीआई से लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि गृह मंत्रालय और सीआईएसएफ के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े तीन अधिकारी उनके विभागीय मामले, सेवा पुस्तिका के निस्तारण और अनुकूल पोस्टिंग/सत्यापन के नाम पर भारी-भरकम रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत की शुरुआती गोपनीय जांच में सीबीआई ने पाया कि आरोप पूरी तरह से सत्य और गंभीर प्रकृति के हैं, जिसके बाद सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया।

सीआईएसएफ हवलदार से रिश्वतखोरी का मामला: कैसे बिछाया गया जाल

पीड़ित हवलदार की शिकायत के आधार पर सीबीआई की टीम ने आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक बेहद शातिर और अचूक जाल बिछाया। तय रणनीति के मुताबिक पीड़ित हवलदार को केमिकलयुक्त भारतीय मुद्रा (फिनोलफ्थलीन पाउडर लगे नोट) देकर आरोपियों द्वारा बताए गए ठिकाने पर भेजा गया। जैसे ही सीआईएसएफ हवलदार ने रांची और धनबाद के सीमावर्ती इलाके या तय स्थान पर पहुंचकर रिश्वत की रकम अधिकारियों को सौंपी, पहले से ही सादे कपड़ों में मुस्तैद सीबीआई की टीम ने तुरंत धावा बोल दिया। सीबीआई के अधिकारियों ने मौके पर ही तीनों अफसरों को रंगे हाथों पकड़ लिया और उनके हाथों को केमिकल घोल में धुलवाकर रिश्वत लेने के अकाट्य साक्ष्य जुटाए। घोल का रंग गुलाबी होते ही यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो गया कि रिश्वत की रकम इन्हीं अधिकारियों द्वारा स्वीकार की गई थी।

रांची और धनबाद में ताबड़तोड़ छापेमारी और दस्तावेजों की जब्ती

गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की कई टीमों ने एक साथ रांची और धनबाद स्थित आरोपियों के सरकारी कार्यालयों, निजी आवासों और संभावित छिपने के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। यह छापेमारी देर रात से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक चलती रही। छापेमारी के दौरान सीबीआई के हाथों कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील दस्तावेज लगे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपियों के ठिकानों से बेनामी संपत्तियों के कागजात, बैंक खातों की पासबुक, कई डिजिटल उपकरण (लैपटॉप और मोबाइल) तथा भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई है। सीबीआई अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि क्या इन अधिकारियों ने इससे पहले भी अन्य सीआईएसएफ कर्मियों या आम नागरिकों से इसी प्रकार डरा-धमकाकर या काम अटकाकर रिश्वत की वसूली की थी।

गृह मंत्रालय और सुरक्षा तंत्र में हड़कंप: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

सीआईएसएफ जैसे अनुशासित अर्धसैनिक बल और गृह मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का नाम रिश्वतखोरी के इस संगीन मामले में सामने आने से प्रशासनिक हलकों में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीआईएसएफ देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों और कोयला खदानों की सुरक्षा में तैनात रहता है, ऐसे में इसके आंतरिक प्रशासनिक तंत्र में इस प्रकार के भ्रष्टाचार का उजागर होना सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक चिंता का विषय है। हालांकि, सीबीआई की इस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली या उच्च पद पर क्यों न बैठा हो, वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता। गृह मंत्रालय ने भी इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।

कानून के शिकंजे में आरोपी: अदालत में पेशी और रिमांड की तैयारी

रंगे हाथों पकड़े गए तीनों अधिकारियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की टीम ने धनबाद और रांची स्थित दफ्तरों में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया है। इसके बाद सीबीआई इन्हें धनबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत (Special CBI Court) में पेश करने जा रही है। सीबीआई के वकीलों का कहना है कि वे अदालत से आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग करेंगे ताकि इस रिश्वतखोरी के सिंडिकेट से जुड़े अन्य तारों, बिचौलियों और उच्च अधिकारियों की संलिप्तता का पूरा सच सामने लाया जा सके। इस मामले की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इसमें और भी कई बड़े नामों के सामने आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

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