झारखंड में नक्सलियों को बड़ा झटका: छह इनामी समेत 16 माओवादियों ने पुलिस के सामने डाले हथियार, मुख्यधारा में लौटे

झारखंड में नक्सलियों को बड़ा झटका: छह इनामी समेत 16 माओवादियों ने पुलिस के सामने डाले हथियार, मुख्यधारा में लौटे

देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षाबलों की लगातार बढ़ती सख्ती और विकास की बयार का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. झारखंड राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य में आतंक का पर्याय बने उग्रवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों का असर अब ऐसा हुआ है कि माओवादियों का हौसला टूटने लगा है. झारखंड पुलिस और सुरक्षाबलों के सामने एक साथ 16 कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है. हैरान करने वाली बात यह है कि इस सरेंडर करने वाले समूह में छह ऐसे खतरनाक नक्सली भी शामिल हैं जिन पर सरकार की तरफ से भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया था. हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटने का यह फैसला राज्य में नक्सलवाद की कमर तोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है.

सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और आत्मसमर्पण नीति का असर

झारखंड के इन खूंखार माओवादियों के इस तरह अचानक हथियार डालने के पीछे पुलिस प्रशासन की कड़ी रणनीतियां और सरकार की आकर्षक आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का बड़ा हाथ है. पिछले कुछ महीनों से राज्य के सुदूर जंगलों में जिस तरह से कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर नक्सलियों के ठिकानों को ध्वस्त किया है, उससे उग्रवादियों के पास जीने या मरने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था. जंगलों में लगातार हो रही घेराबंदी और रसद आपूर्ति बाधित होने के कारण इन माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर कानून के सामने झुकना बेहतर समझा. प्रशासन की तरफ से लगातार यह अपील की जा रही थी कि जो भटके हुए लोग मुख्यधारा से दूर हैं, वे हिंसा छोड़ें और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन की शुरुआत करें.

छह इनामी समेत सभी ने सौंपे अपने आधुनिक हथियार

आत्मसमर्पण करने वाले इन 16 माओवादियों में संगठन के कई महत्वपूर्ण कैडर और कमांडर स्तर के लोग भी शामिल हैं. इन सभी ने पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष औपचारिक रूप से अपने हथियार सौंप दिए. सौंपे गए हथियारों में कई अत्याधुनिक राइफलें, कारतूस और अन्य सैन्य सामग्री शामिल हैं जिनका इस्तेमाल ये लोग सुरक्षाबलों के खिलाफ छिपकर हमले करने के लिए करते थे. पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन सभी ने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए त्यागने की शपथ ली. सरकार की पुनर्वास नीति के तहत अब इन सभी सरेंडर करने वाले उग्रवादियों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, रोजगार के अवसर और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी ताकि वे समाज में दोबारा एक सम्मानजनक जीवन जी सकें. इस बड़ी सफलता से झारखंड को नक्सल मुक्त बनाने के संकल्प को और अधिक मजबूती मिली है.

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