पति ने हत्या की नीयत से अपनी ही पत्नी को चलती नदी के पुल से नीचे धकेला
वैवाहिक रिश्तों और पति-पत्नी के पवित्र बंधन की जब भी बात की जाती है, तो यही उम्मीद की जाती है कि जीवन के हर सुख-दुख में दोनों एक-दूसरे की ढाल बनकर खड़े रहेंगे। लेकिन इंसानी फितरत की दरिंदगी जब अपने चरम पर पहुंच जाती है, तो कई बार अपनों के ही चेहरे ऐसे भयानक रूप में सामने आते हैं जो रोंगटे खड़े कर देते हैं। देश के एक हिस्से से इस समय एक बेहद खौफनाक, दिल दहला देने वाली और सनसनीखेज आपराधिक वारदात सामने आई है, जिसने पूरे समाज को अंदर से हिला कर रख दिया है। एक कलयुगी पति ने आपसी विवाद और खूनी साजिश के तहत अपनी ही पत्नी को सुनसान पुल से सीधे उफनती हुई खतरनाक नदी में नीचे धकेल दिया, ताकि वह हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो जाए। लेकिन कहते हैं कि 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय'; उस बेबस महिला ने हार नहीं मानी और मौत के मुंह से लड़ते हुए तैरकर बीच नदी के एक छोटे से टापू तक जा पहुंची, जहां उसने पूरी रात आसमान के नीचे खौफ और ठंड के साये में बिताई। अगली सुबह जब कुछ स्थानीय मछुआरों और ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत रेस्क्यू करके उसकी जान बचाई। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस रोंगटे खड़े कर देने वाली खौफनाक घटना की पूरी सच्चाई क्या है और कैसे इस महिला ने मौत को मात दी।
आपसी रंजिश और खौफनाक साजिश: पुल से नदी में फेंके जाने की वह खौफनाक दास्तान
शुरुआती पुलिस जांच और पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए बयानों के अनुसार, आरोपी पति और उसकी पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से घरेलू मामलों को लेकर गंभीर मनमुटाव चल रहा था। घटना की शाम को आरोपी पति किसी बहाने से अपनी पत्नी को अपनी बाइक पर बिठाकर एक सुनसान इलाके में बने ऊंचे पुल पर लेकर पहुंचा, जहां आसपास दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं थी। पत्नी को यह बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि जिस जीवनसाथी के साथ वह बैठी है, वह उसके कत्ल की खौफनाक साजिश पहले ही रच चुका है। जैसे ही वे पुल के बीचों-बीच पहुंचे, पति ने बिना किसी चेतावनी के अचानक अपनी पत्नी को जोर का धक्का दे दिया, जिससे वह सीधे कई फीट नीचे उफनती हुई तेज धार वाली नदी के गहरे पानी में जा गिरी। आरोपी यह मानकर वहां से फरार हो गया कि अब उसकी पत्नी का बचना असंभव है और उसका गुनाह हमेशा के लिए दफन हो जाएगा, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि कुदरत के कुछ और ही इरादे थे।
उफनती लहरों से जंग: तैरकर नदी के बीचों-बीच बने टापू तक पहुंचने का अदम्य साहस
पानी में गिरते ही तेज बहाव और डूबने के डर के बावजूद उस साहसी महिला ने अपने होश नहीं खोए और अपनी जिंदगी बचाने के लिए पानी के खिलाफ जंग लड़नी शुरू कर दी। चूंकि उसे तैरना आता था, इसलिए उसने अपनी बची हुई सारी ताकत का इस्तेमाल किया और अंधेरे तथा तेज बहाव के बीच किसी तरह तैरते हुए नदी के बीच में उभरे एक छोटे से रेतीले टापू (Islet) तक पहुंचने में कामयाब हो गई। वह टापू इतना छोटा और सुरक्षित नहीं था, लेकिन कम से कम वह गहरे पानी के तेज बहाव से बाहर आ चुकी थी। शरीर पूरी तरह भीगा हुआ, कपड़ों से पानी टपक रहा था और रात के वक्त आसमान में मंडराते खतरे के बीच उस महिला ने उस वीरान टापू पर अकेले ही पूरी रात बिताई। उस एक-एक पल में उसने मानसिक और शारीरिक रूप से जिस भयंकर प्रताड़ना और डर का सामना किया, उसकी कल्पना मात्र से किसी भी इंसान की रूह कांप सकती है।
अंधेरे और खौफ के साये में कटी पूरी रात: मौत के मुहाने पर बैठी बेबस महिला का संघर्ष
जब रात का अंधेरा गहराता गया और चारों तरफ केवल नदी के पानी की डरावनी आवाजें सुनाई दे रही थीं, तब उस महिला के दिल में एक ही उम्मीद थी कि किसी तरह सुबह हो और वह अपने बच्चों तथा परिवार से दोबारा मिल सके। ठंड और कंपकपाती हवाओं के बीच बिना किसी खाने-पीने के सहारे उस टापू पर रात गुजारना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। उसने अपनी हिम्मत टूटने नहीं दी और लगातार भगवान से प्रार्थना करती रही कि उसे इस मुसीबत से बाहर निकाला जाए। उसके मन में अपने पति की इस गद्दारी और क्रूरता का गुस्सा भी था और साथ ही अपने जीवन को बचाने की जिजीविषा भी, जिसने उसे सुबह होने तक जिंदा रहने की बेपनाह ताकत दी। इस प्रकार के हादसे यह साबित करते हैं कि इंसान के भीतर का मानसिक बल दुनिया की सबसे बड़ी से बड़ी आपदाओं को भी मात दे सकता है।
सुबह होते ही फरिश्ते बनकर आए स्थानीय ग्रामीण: मछुआरों ने ऐसे बचाई महिला की जान
अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण नदी के उस इलाके पर पड़ी, तो कुछ स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण अपनी नाव लेकर मछली पकड़ने या नदी पार करने के लिए उस तरफ निकले। उनकी नजर जब उस वीरान टापू पर एक महिला को बेसुध और ठंड से कांपते हुए हालात में बैठी हुई पड़ी, तो उन्हें शक हुआ कि जरूर कोई बड़ी अनहोनी हुई है। वे तुरंत अपनी नाव को उस टापू की तरफ लेकर गए और महिला के पास पहुंचकर उसे पानी पिलाया तथा उसे सुरक्षित अपनी नाव में बिठाकर गांव की तरफ ले आए। ग्रामीणों ने तुरंत इस बात की सूचना स्थानीय पुलिस थाने को दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आरोपी पति की गिरफ्तारी: सलाखों के पीछे पहुंचा दरिंदा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस हरकत में आ गई और उसने पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी पति के खिलाफ हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस कलयुगी पति को कुछ ही घंटों के भीतर उसके छिपने के ठिकाने से धर दबोचा। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले तो पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की और पीड़िता के बयान सामने रखे, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इस सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग इस बात से हैरान हैं कि कोई पति अपनी ही पत्नी के साथ इतनी बड़ी क्रूरता कैसे कर सकता है। कुल मिलाकर, इस घटना ने एक तरफ जहां इंसानियत को शर्मसार किया है, वहीं दूसरी तरफ उस महिला के अदम्य साहस ने यह साबित कर दिया है कि इरादे मजबूत हों तो मौत भी हार मान लेती है।