
नई दिल्ली:वक्फ कानून को लेकर सियासी गर्मी तेज हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU ने अब तक इस पर अपना साफ स्टैंड नहीं लिया है, लेकिन संकेत दिए हैं कि वो बिल को लेकर पूरी तरह सहमत नहीं है। इस बिल को 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।
JDU के राज्यसभा सांसद संजय झा ने बयान दिया है कि पार्टी ने सहयोगी BJP से आग्रह किया है कि वक्फ कानून पूर्व प्रभाव (retrospective effect) से लागू न किया जाए। उनका कहना है, “हमने सरकार से कहा है कि यह कानून पीछे की तारीख से लागू न हो। हमें उम्मीद है सरकार इस पर विचार करेगी… जब तक नीतीश कुमार राजनीति में हैं, तब तक जनता के हक की हिफाजत होती रहेगी।”
केंद्र ने JDU की शर्तों से किया इनकार
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने हालांकि इससे इनकार कर दिया है कि JDU की तरफ से कोई ऐसी मांग रखी गई है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि आपको यह जानकारी कहां से मिली…”
वहीं, मंत्री कुरियन को भरोसा है कि बिल दोनों सदनों में पारित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि “लोग विपक्षी सांसदों को भी मजबूर करेंगे… यहां तक कि कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस का फैसला भी सांसदों को अपनी पार्टी से अलग सोचने को मजबूर कर रहा है। सभी समुदाय इसका समर्थन करेंगे, जिसमें गरीब मुसलमान भी शामिल हैं।”
कांग्रेस का पलटवार – “अगर समर्थन दिया तो मुसलमान नहीं देंगे वोट”
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने JDU, LJP (रामविलास) और TDP जैसी NDA सहयोगी पार्टियों को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा,
“अगर आप वक्फ बिल के पक्ष में वोट देंगे, तो मुसलमान आपको कभी वोट नहीं देंगे।”
JDU और TDP का पलटवार – ‘हमें कांग्रेस से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए’
JDU नेता और केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा,
“नीतीश कुमार ने मुसलमानों के लिए जितना किया है, उतना कांग्रेस ने नहीं किया। JDU को कांग्रेस से कोई सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।”
इधर, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने भी अपने रुख को फिलहाल खुला रखा है लेकिन भरोसा दिलाया है कि चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के हित को ध्यान में रखकर फैसला लेंगे।
TDP प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने कहा,
“हमारी पार्टी मुस्लिम समुदाय के हित में है। बिल के पेश होने के बाद हम अपना स्टैंड साफ करेंगे, लेकिन नायडू जी हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहे हैं।”