चीन-अमेरिका के झगड़े में क्या भारत की लॉटरी लगने वाली है?

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कहते हैं न, जब दो बड़े लोग लड़ते हैं, तो किसी तीसरे का फ़ायदा हो जाता है। कुछ ऐसा ही आजकल दुनिया में हो रहा है, जहाँ अमेरिका और चीन के बीच ज़बरदस्त व्यापारिक खींचतान चल रही है। अमेरिका अब चीन से अपना सारा सामान नहीं खरीदना चाहता और उस पर तरह-तरह के टैक्स लगा रहा है। इस वजह से दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कंपनियाँ अब चीन से अपना कारोबार समेटकर किसी नई जगह की तलाश में हैं।

और जानते हैं, इस तलाश में सबकी नज़रें आकर कहाँ टिक रही हैं? अपने भारत पर!

कंपनियाँ क्यों भाग रही हैं चीन से?

सालों तक चीन दुनिया की "फैक्ट्री" कहलाता था। यानी दुनिया का ज़्यादातर सामान वहीं बनता था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं और कोई भी कंपनी अपना सारा पैसा एक ही जगह लगाकर जोखिम नहीं लेना चाहती। सब एक नया और भरोसेमंद ठिकाना ढूंढ रहे हैं, और भारत इस दौड़ में सबसे आगे खड़ा दिख रहा है।

भारत क्यों है सबकी पहली पसंद?

अब सवाल उठता है कि आख़िर भारत में ऐसा क्या है, जो दुनिया भर की कंपनियाँ यहाँ आने के लिए इतनी उत्सुक हैं? इसके कई कारण हैं:

  1. हमारी विशाल आबादी: भारत में काम करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं है। साथ ही, हमारा देश खुद एक बहुत बड़ा बाज़ार है।
  2. सरकार की कोशिशें: "मेक इन इंडिया" जैसी योजनाओं से सरकार कंपनियों को भारत में फैक्ट्री लगाने के लिए बढ़ावा दे रही है।
  3. बढ़ता भरोसा: दुनिया अब भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद देश के रूप में देख रही है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो हम अपने हाथों में देख रहे हैं। Apple जैसी बड़ी कंपनी ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करते हुए भारत में बड़े पैमाने पर आईफ़ोन (iPhone) बनाने शुरू कर दिए हैं। यह तो बस एक शुरुआत है।

क्या ये राह इतनी आसान है?

हालांकि, यह मौका बहुत बड़ा है, लेकिन भारत को इसके लिए बहुत मेहनत करनी होगी। हमें वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों से भी मुकाबला करना है, जो कंपनियों को अपनी ओर खींचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हमें अपने यहाँ सड़कें, बिजली और व्यापार करने के नियमों को और भी बेहतर बनाना होगा।

अगर भारत इस सुनहरे मौके का सही इस्तेमाल कर पाया, तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया की अगली "फैक्ट्री" चीन नहीं, बल्कि भारत कहलाएगा। यह हमारे देश के लिए तरक्की के नए दरवाज़े खोल सकता है।