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April 03 2026 11:59 am

स्पेस रेस में भारत का बज रहा डंका नासा ने अब भरी उड़ान, लेकिन साउथ पोल पर इसरो पहले ही गाड़ चुका है झंडा

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News India Live, Digital Desk:ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को जानने की होड़ अब और भी दिलचस्प हो गई है। साल 1972 के बाद पहली बार अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) का 'एसएलएस' (SLS) रॉकेट चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर आज 2 अप्रैल 2026 को चंद्रमा की ओर रवाना हो गया है। लेकिन इस ऐतिहासिक दिन पर पूरी दुनिया की नजरें नासा के साथ-साथ भारत पर भी टिकी हैं। दरअसल, जिस रहस्यमयी 'साउथ पोल' (दक्षिणी ध्रुव) की कक्षा की ओर नासा ने अब अपने कदम बढ़ाए हैं, वहां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का 'चंद्रयान-3' पहले ही तिरंगा फहराकर भारत की तकनीकी शक्ति का लोहा मनवा चुका है।

साउथ पोल पर इसरो का ऐतिहासिक कारनामा 23 अगस्त 2023 का वह दिन इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है, जब इसरो के चंद्रयान-3 ने चांद के सबसे दुर्गम और ठंडे इलाके (दक्षिणी ध्रुव) पर अपने रोवर की सफल लैंडिंग कर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था। यह महज एक अंतरिक्ष मिशन की सफलता नहीं थी, बल्कि सीमित संसाधनों के बीच भारत की अदम्य इच्छाशक्ति और डिजिटल क्रांति की एक ऐसी दास्तान थी जिसने विकसित देशों को भी भारत का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया।

साइकिल और बैलगाड़ी से शुरू हुआ था शानदार सफर आज के दौर में भले ही हम 5G इंटरनेट और सुपरकंप्यूटर की बात करते हैं, लेकिन भारत का स्पेस प्रोग्राम इंटरनेट आने से कई दशक पहले ही आकार ले चुका था। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 1960 के दशक में इसरो के पास कोई एडवांस लैब नहीं थी। रॉकेट के कलपुर्जे एक चर्च के छोटे से कमरे में असेंबल किए जाते थे और उन्हें लॉन्च पैड तक ले जाने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने साइकिल और बैलगाड़ी तक का इस्तेमाल किया था। इंटरनेट न होने के बावजूद वैज्ञानिक भारी-भरकम मैनुअल कैलकुलेशन और अपनी मेधा के दम पर सफल परीक्षण कर रहे थे।

इंटरनेट आने से पहले ही भारत ने रच दिया था इतिहास देश में आम लोगों के लिए इंटरनेट की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) के जरिए हुई थी। लेकिन इस डिजिटल युग में प्रवेश करने से पहले ही भारत अंतरिक्ष में अपनी धाक जमा चुका था। 1975 में भारत ने अपना पहला उपग्रह 'आर्यभट्ट' लॉन्च किया और 1980 में खुद के रॉकेट 'SLV-3' से स्पेस में उपग्रह भेजकर दुनिया का छठा शक्तिशाली देश बन गया। बिना इंटरनेट के भी इसरो ने ग्राउंड स्टेशन और सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए गांवों को कनेक्ट किया और कृषि व शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने का काम किया।

क्या है नासा का बहुप्रतीक्षित 'आर्टेमिस 2' मिशन? बात करें नासा के 'आर्टेमिस 2' मिशन की, तो आज 2 अप्रैल 2026 को सुबह फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से नासा के रॉकेट ने जोरदार गर्जना के साथ उड़ान भरी है। यह मिशन आर्टेमिस कार्यक्रम का दूसरा अहम चरण है, जिसका लक्ष्य 2020 के दशक के आखिर तक चांद की सतह पर पहली महिला और इंसान को उतारना है। आर्टेमिस 2 की सफलता के बाद नासा अगले चरण में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की योजना बना रहा है। लेकिन इस पूरी स्पेस रेस में इसरो की बेमिसाल यात्रा हमेशा एक मिसाल बनकर दुनिया को प्रेरित करती रहेगी।