पाकिस्तान का साथ देना पड़ा महंगा! भारतीयों ने तुर्की-अज़रबैजान जाना छोड़ा, पर्यटन उद्योग हुआ ठप
"अतिथि देवो भव:" मानने वाले भारतीय अब गुस्से में हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बढ़े तनाव के बीच, पाकिस्तान का खुलकर साथ देने का फैसला तुर्की और अज़रबैजान को बहुत भारी पड़ रहा है। नाराज़ भारतीय पर्यटकों ने इन दोनों देशों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है, जिससे इनके पर्यटन उद्योग पर मानों ताला लग गया है।
56% तक की भारी गिरावट, हिल गई अर्थव्यवस्था
ट्रैवल इंडस्ट्री से आ रहे आंकड़े हैरान करने वाले हैं। पिछले कुछ महीनों में:
- अज़रबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 56% की भारी गिरावट आई है।
- वहीं, तुर्की जाने वाले भारतीयों की संख्या में भी 33.3% की कमी दर्ज की गई है।
यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि इन देशों की अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा हमला है, क्योंकि भारतीय पर्यटक इन जगहों पर खूब पैसा खर्च करते थे। आलम यह है कि ट्रैवल एजेंसियों ने भी तुर्की और अज़रबैजान के टूर पैकेज बेचना और होटल बुकिंग करना लगभग बंद कर दिया है।
बुकिंग कैंसल, अब दुबई और बैंकॉक पहली पसंद
एक मशहूर ट्रैवल ऐप के अनुसार, जब से तुर्की और अज़रबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया है, तब से:
- इन देशों के लिए भारतीयों की बुकिंग में 60% की गिरावट आई है।
- और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बुकिंग कैंसल कराने की दर में 250% का उछाल आया है।
साफ है कि भारतीय अब इन देशों को अपनी छुट्टियों की लिस्ट से बाहर निकाल रहे हैं। इसकी जगह वे अब दुबई, बैंकॉक, और श्रीलंका जैसे देशों को चुन रहे हैं, जहां उनका स्वागत गर्मजोशी से होता है।
क्यों है यह गुस्सा?
ट्रैवल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बहिष्कार भारतीयों की भावनात्मक प्रतिक्रिया है। जब तुर्की और अज़रबैजान ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के खिलाफ जाकर पाकिस्तान का साथ दिया, तो इससे भारतीय पर्यटकों को बहुत ठेस पहुंची। एक विश्लेषक ने कहा, "यह फैसला दिखाता है कि भारतीय अब सिर्फ घूमने ही नहीं जाते, बल्कि वे यह भी देखते हैं कि कौन सा देश उनके देश के साथ खड़ा है।"
यह घटना तुर्की और अज़रबैजान के लिए एक बड़ा सबक है कि भारत जैसे बड़े और संवेदनशील बाजार को नाराज़ करने का नतीजा क्या हो सकता है। यह सिर्फ पर्यटन का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे दोनों देशों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों पर भी बुरा असर पड़ सकता है।