Indian Politics : उस महिला में इस आदमी से ज्यादा दम था - इंदिरा गांधी का जिक्र कर पीएम मोदी पर राहुल का सबसे बड़ा हमला
News India Live, Digital Desk : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा और व्यक्तिगत हमला बोला है। अपनी दादी और देश की पूर्व प्रधानमंत्री, स्वर्गीय इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए राहुल ने पीएम मोदी की 'मजबूत नेता' वाली छवि पर सीधा सवाल उठाया है और दावा किया कि उनकी दादी में आज के प्रधानमंत्री से कहीं ज्यादा 'दम' और हिम्मत थी।
एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी पूरे आक्रामक मूड में नजर आए। उन्होंने पीएम मोदी की कार्यशैली और उनकी राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि आज देश में सिर्फ नफरत और डर का माहौल बनाया जा रहा है।
"वो डरती नहीं थीं, और न ही डराती थीं"
राहुल गांधी ने अपनी दादी को याद करते हुए कहा, "मैं अपनी दादी को जानता था। उस महिला में इस आदमी (पीएम मोदी) से ज्यादा दम था। और मैं यह आपको बता सकता हूं।"
उन्होंने आगे इंदिरा गांधी और पीएम मोदी के बीच एक बड़ा अंतर बताते हुए कहा, "उनके (इंदिरा गांधी) मन में कभी किसी के लिए नफरत नहीं थी। वह डरती नहीं थीं, और सबसे जरूरी बात, वह लोगों को डराती नहीं थीं। लेकिन यह आदमी (पीएम मोदी) 24 घंटे सिर्फ नफरत फैलाता और डर पैदा करता है।"
'56 इंच के सीने' पर सीधा वार
राहुल गांधी का यह बयान सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी की उस '56 इंच के सीने' वाली छवि पर एक बड़ा हमला है, जिसे बीजेपी हमेशा एक मजबूत और निडर नेता के तौर पर पेश करती है। राहुल ने यह कहने की कोशिश की कि असली ताकत और हिम्मत डराने या नफरत फैलाने में नहीं, बल्कि बिना डरे देश के लिए फैसले लेने में होती है, जैसा कि उनकी दादी इंदिरा गांधी करती थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकार सिर्फ डर के सहारे चल रही है। उन्होंने कहा, "वे डरते हैं। वे 24 घंटे डरे हुए रहते हैं। वे देश के युवाओं से डरते हैं, किसानों से डरते हैं, महिलाओं से डरते हैं।"
क्या हैं इस बयान के सियासी मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वह सीधे तौर पर पीएम मोदी की 'मजबूत नेता' की छवि को चुनौती दे रहे हैं और अपनी दादी की 'आयरन लेडी' वाली छवि को सामने रखकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस के नेता भी मजबूत और निर्णायक रहे हैं।
यह बयान आने वाले समय में निश्चित रूप से भारतीय राजनीति में एक बड़ी बहस छेड़ेगा, जहां 'असली ताकत' की परिभाषा पर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक बार फिर आमने-सामने होंगे।