Indian Defense : भारतीय वायु सेना का उड़ता ताबूत मिग-21 ,क्या खत्म होगा इसका दर्दनाक सफर 2025 तक?

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News India Live, Digital Desk:  Indian Defense : मिग-21, भारतीय वायु सेना का वो विमान, जिसे कभी 'रीढ़' की हड्डी माना जाता था और जो दशकों तक हमारे आसमान का रखवाला रहा, लेकिन अब ये अपनी विवादित 'फ्लाइंग कॉफिन' यानी उड़ता ताबूत की छवि के कारण खबरों में है। दुर्भाग्य से, मिग-21 का दुर्घटना रिकॉर्ड काफी लंबा रहा है, जिसने हमारे कई जांबाज पायलटों की जानें ली हैं। इस अकेले इंजन वाले सुपरसोनिक जेट ने इंटरसेप्टर, ग्राउंड अटैक और रेकनाइसेन्स जैसे कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इसने अपनी बहादुरी का परचम लहराया था, जो हमेशा इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

हालांकि, बीते सालों में इसकी लगातार दुर्घटनाओं ने सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिस कारण जनता और राजनीतिक हलकों से इसे जल्द से जल्द हटाने की मांग उठती रही है। खुशी की बात ये है कि अब भारतीय वायु सेना इस विमान को 2025 तक चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना पर काम कर रही है। अभी भी तीन मिग-21 स्क्वाड्रन सेवा में हैं, जिनमें बिशन, टाइप 96 और टाइप 75 वेरिएंट के एक-एक स्क्वाड्रन शामिल हैं। इनकी जगह लेने के लिए सुखोई Su-30MKI, HAL तेजस और डसॉल्ट राफेल जैसे आधुनिक विमान तैयार हैं।

इन विमानों के हादसों में, 2022 में बाड़मेर में हुई दुर्घटना ख़ास तौर पर याद की जाती है, जिसमें विंग कमांडर मोहित राणा और फ्लाइट लेफ्टिनेंट अद्वित्या बाल जैसे बहादुर पायलट हमने खो दिए थे। नए पायलटों को पहले मिग-21 पर ही प्रशिक्षित किया जाता रहा है, और फिर वे आधुनिक जेट्स में स्थानांतरित होते हैं। इन विमानों का सफर भले ही विवादों से भरा रहा हो, लेकिन इसने भारतीय वायुसेना को एक मजबूत नींव दी है, और हमारे पायलटों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।