India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता! 18% रह जाएगा टैरिफ, जेनेरिक दवाएं और हीरे होंगे सस्ते; जानें 11 बड़ी बातें
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। दोनों देशों के बीच हुए एक बड़े अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले भारी-भरकम 50% टैरिफ को घटाकर मात्र 18% करने पर सहमति जताई है। इस समझौते के बाद भारतीय निर्यातकों, विशेषकर छोटे कारोबारियों और किसानों के लिए अमेरिका का 30 लाख करोड़ डॉलर ($30 Trillion) का विशाल बाजार खुल जाएगा।
यद्यपि दोनों देशों ने फिलहाल एक संयुक्त बयान जारी किया है, लेकिन इस समझौते पर मार्च के मध्य तक औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिसके बाद नई दरें प्रभावी हो जाएंगी।
1. टैरिफ में भारी कटौती: भारतीय निर्यात को पंख
अमेरिका द्वारा टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने का सीधा फायदा भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर और हस्तशिल्प उद्योगों को मिलेगा। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि घरेलू स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
2. जेनेरिक दवाएं और हीरे होंगे पूरी तरह ड्यूटी फ्री
समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण उत्पादों पर टैरिफ को पूरी तरह जीरो (0%) कर दिया जाएगा। इनमें भारतीय जेनेरिक दवाएं, जेम्स एंड ज्वेलरी (हीरे) और विमानों के पुर्जे शामिल हैं। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय दवाओं की पहुंच आसान होगी और देश के आभूषण उद्योग को बड़ी मजबूती मिलेगी।
3. भारतीय कृषि क्षेत्र को मिला 'सुरक्षा कवच'
भारत ने अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों पर कोई समझौता नहीं किया है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर और मांस जैसे उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, ताकि भारतीय किसानों के हितों पर कोई आंच न आए।
4. वाइन और लग्जरी प्रोडक्ट्स होंगे सस्ते
समझौते के बदले में भारत भी अमेरिकी इंडस्ट्रियल और कुछ एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क कम करेगा। इनमें वाइन, स्पिरिट्स, ट्री नट्स (बादाम-अखरोट), ताजे फल और सोयाबीन तेल शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका के मेडिकल डिवाइस बिजनेस के लिए भी भारत ने नियमों को आसान बनाने पर सहमति दी है।
5. डिजिटल ट्रेड और हाई-टेक पार्टनरशिप
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दोनों देश GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) और डेटा सेंटर टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाएंगे। डिजिटल ट्रेड के रास्ते की रुकावटों को दूर किया जाएगा, जिससे आईटी सेक्टर को सीधा लाभ होगा।
6. ऊर्जा और टेक्नोलॉजी पर बड़ा निवेश
भारत का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब $50 हजार करोड़ के एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट पार्ट्स और टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स मंगाना है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विमानन क्षेत्र को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
सौदे की 11 अहम बातें एक नजर में:
टैरिफ में कमी: 50% से घटकर 18% होगा अमेरिकी टैरिफ।
जीरो ड्यूटी: दवाओं, हीरों और विमान पुर्जों पर कोई टैक्स नहीं।
कृषि सुरक्षा: चावल, गेहूं और दूध जैसे उत्पाद सुरक्षित।
अमेरिकी वाइन: भारत में सस्ती होगी अमेरिकी वाइन और स्पिरिट्स।
मेडिकल डिवाइस: अमेरिकी मेडिकल उपकरणों के लिए नियम होंगे सरल।
इंपोर्ट लाइसेंसिंग: ICT प्रोडक्ट्स के लिए लाइसेंस प्रक्रिया होगी समाप्त।
पावर ऑफ रेसिप्रोसिटी: एक देश टैरिफ बदलेगा तो दूसरे को भी हक होगा।
सप्लाई चेन: चीन जैसे देशों की बाजार-विरोधी नीतियों से मिलकर निपटेंगे।
ऊर्जा आयात: $50 बिलियन के एनर्जी प्रोडक्ट्स खरीदेगा भारत।
GPU ट्रेड: डेटा सेंटर और AI तकनीक में बढ़ेगा आपसी सहयोग।
डिजिटल ट्रेड: ऑनलाइन कारोबार की बाधाएं होंगी दूर।