India Trade Policy: किसानों के लिए केंद्र का बड़ा फैसला! नई ट्रेड पॉलिसी में विदेशी उत्पादों पर लगेगी लगाम, आय सुरक्षा के लिए बना 'कवच'
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों किसानों के हितों की रक्षा के लिए अपनी नई व्यापार नीति (Trade Policy) में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। नई नीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं और विदेशी उत्पादों की होड़ से बचाना है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते या आयात-निर्यात सौदे में किसानों की सुरक्षा सर्वोपरि होगी और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सरकार के इस कदम को 'आत्मनिर्भर कृषि' की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
नई ट्रेड पॉलिसी: क्या-क्या बदला?
सरकार ने विदेशी कृषि उत्पादों के बेतरतीब आयात को रोकने के लिए कई कड़े प्रावधान लागू किए हैं:
ड्यूटी और नियंत्रण तंत्र: अब सरकार कृषि उत्पादों के आयात पर 24 घंटे नजर रखेगी। यदि विदेशी सामान सस्ता होने के कारण घरेलू किसानों को नुकसान होता है, तो तुरंत इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) बढ़ा दी जाएगी।
MSP और ट्रेड का संगम: पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और घरेलू खरीद व्यवस्था को ट्रेड पॉलिसी के साथ सीधे जोड़ा गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आयातित उत्पादों के कारण घरेलू स्तर पर फसलों के दाम न गिरें।
परामर्श प्रक्रिया: संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अब किसानों और राज्य सरकारों से विचार-विमर्श करना अनिवार्य होगा।
किसानों को कैसे मिलेगा 'सुरक्षा कवच'?
विशेषज्ञों के अनुसार, India Trade Policy Update के बाद किसानों को निम्नलिखित सीधे लाभ होंगे:
बाजार में स्थिरता: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आने पर भी भारतीय मंडियों में फसलों के दाम स्थिर रहेंगे।
आय की गारंटी: सस्ते विदेशी उत्पादों (जैसे खाद्य तेल या दालें) के कारण घरेलू मांग कम नहीं होगी, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा।
पारदर्शिता: नीति निर्माण में किसानों की भागीदारी बढ़ने से सरकारी योजनाओं के प्रति भरोसा और मजबूती बढ़ेगी।
आत्मनिर्भर भारत और कृषि का भविष्य
नई व्यापार नीति केवल आयात को रोकने के बारे में नहीं है, बल्कि भारतीय कृषि को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के बारे में भी है। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय किसान केवल अपनी जरूरतें पूरी न करें, बल्कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ विदेशी बाजारों में भी अपनी धाक जमाएं। यह कदम न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि लंबे समय में किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक होगा।