किम जोंग उन की मां का राज: क्यों नॉर्थ कोरिया में नहीं लिया जाता उनका नाम,जानें कैसे बनी तानाशाह की सत्ता की राह
'पवित्र रक्त' और मां के अतीत का विरोधाभास उत्तर कोरिया की सत्ता 'माउंट पेक्टू रक्तसमूह' (Mount Paektu Bloodline) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे देश पर शासन करने के लिए सबसे शुद्ध और वीर माना जाता है। लेकिन किम जोंग उन की मां, को योंग-ही का इतिहास इस सरकारी दावे के बिल्कुल उलट है। रिपोर्ट्स के अनुसार, को योंग-ही का जन्म 1952 में जापान के ओसाका में हुआ था। उनका परिवार एक पुनर्वास कार्यक्रम के तहत उत्तर कोरिया आया था, लेकिन उस समय वहां के समाज में जापान से आए लोगों को हेय दृष्टि से देखा जाता था। यही कारण है कि किम जोंग उन की मां की सामाजिक पृष्ठभूमि को उनके 'पवित्र' परिवारिक इतिहास के लिए एक बड़ी बाधा माना जाता है, जिसे प्योंगयांग का प्रोपेगेंडा हमेशा छिपाने की कोशिश करता है।
डांस, खूबसूरती और प्रेम कहानी का सफर को योंग-ही एक प्रतिभाशाली डांसर थीं और सरकारी आर्ट ट्रूप से जुड़ी हुई थीं। उनकी खूबसूरती और नृत्य ने तत्कालीन तानाशाह किम जोंग इल को अपनी ओर आकर्षित किया। उस समय किम जोंग इल पहले से ही विवाहित थे, लेकिन को योंग-ही के साथ उनके संबंधों ने एक नया मोड़ लिया। चूंकि उनकी शादी आधिकारिक नहीं थी, इसलिए को योंग-ही और उनके बच्चे राजधानी प्योंगयांग से दूर वोनसान शहर में रहने लगे। 2004 में स्तन कैंसर से उनकी मौत के बाद भी उत्तर कोरियाई मीडिया ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी, क्योंकि उनका जापानी जन्म किम परिवार की 'शुद्धता' की छवि को कमजोर कर सकता था।
सत्ता का खेल: कैसे बनीं किंगमेकर? किम जोंग उन के सत्ता तक पहुँचने के पीछे उनकी मां को योंग-ही का सबसे बड़ा हाथ माना जाता है। तानाशाह बनने की दौड़ में कई नाम थे—किम जोंग इल के बड़े बेटे किम जोंग नम, जो सुधारों की वकालत के कारण पिता का भरोसा खो चुके थे और बाद में जिनकी मलेशिया में हत्या कर दी गई; और दूसरे भाई किम जोंग चुल, जो कथित रूप से निजी जीवन में व्यस्त थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि को योंग-ही ने ही पर्दे के पीछे से यह सुनिश्चित किया कि उनका बेटा किम जोंग उन ही अगला उत्तराधिकारी बने। अन्य दावेदारों के बाहर होने के बाद, मां की इस राजनीतिक बिसात ने किम जोंग उन को दुनिया के सबसे रहस्यमय और क्रूर तानाशाह की कुर्सी तक पहुँचा दिया। आज भी को योंग-ही का नाम उत्तर कोरिया की आधिकारिक गाथाओं में एक बड़ा 'ब्लैकआउट' है, क्योंकि उनका सच शासन की नींव पर उठने वाले सवालों को जन्म देता है।