डोनाल्ड ट्रंप की जान पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा? इजरायल की चेतावनी पर क्यों भरोसा नहीं कर पा रही अमेरिकी एजेंसी CIA

डोनाल्ड ट्रंप की जान पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा? इजरायल की चेतावनी पर क्यों भरोसा नहीं कर पा रही अमेरिकी एजेंसी CIA

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा गलियारों में इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी लगातार अमेरिका को आगाह कर रही है कि ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की खतरनाक साजिश रच रहा है। इजरायल का दावा है कि ईरान कभी स्नाइपर, कभी चाकू तो कभी मिसाइल के जरिए ट्रंप को निशाना बना सकता है। हालांकि, इजरायल द्वारा दी जा रही इन तमाम चेतावनियों और खुफिया इनपुट्स के बावजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) और अन्य अमेरिकी अधिकारी इन दावों पर पूरी तरह आंख मूंदकर भरोसा करने से बच रहे हैं।

तुर्की दौरे के दौरान क्यों बदलना पड़ा था ट्रंप का विमान

इजरायल की तरफ से दी गई सबसे खतरनाक चेतावनियों में से एक वाकया जुलाई महीने में तुर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इजरायली खुफिया एजेंसी ने सीधे व्हाइट हाउस को अलर्ट भेजा था कि जब डोनाल्ड ट्रंप अपने आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' से उड़ान भरेंगे, तो ईरान शोल्डर मिसाइल के जरिए उस पर हमला कर सकता है। हालांकि अमेरिकी एजेंसियों को इस इनपुट पर पूरा भरोसा नहीं था, फिर भी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सीक्रेट सर्विस ने कोई जोखिम नहीं उठाया। एक गुप्त ऑपरेशन के तहत ट्रंप को एयरफोर्स वन से निकालकर चुपचाप दूसरे विमान में शिफ्ट किया गया। वहीं दूसरी तरफ, जब तुर्की की खुफिया एजेंसियों ने इन दावों की अपने स्तर पर जांच की, तो उन्हें ट्रंप पर हमले की साजिश का कोई भी पुख्ता सबूत नहीं मिला।

इजरायली खुफिया इनपुट्स पर CIA को क्यों है संदेह

सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका इन चेतावनियों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त क्यों नहीं हो पा रहा है? रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी इन खुफिया जानकारियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि (Independent Verification) नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते सीआईए का इजरायली इनपुट्स पर भरोसा थोड़ा कमजोर है। अमेरिका का यह भी मानना है कि साल 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद से ईरान बदला लेने की फिराक में जरूर है, लेकिन परमाणु हथियारों और अन्य सुरक्षा मामलों में भी अमेरिका और इजरायल के आकलन अक्सर अलग रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना था कि ईरान सक्रिय रूप से परमाणु बम नहीं बना रहा है, जबकि इजरायल इसके उलट लगातार दावे करता रहा है।

क्या अमेरिका को युद्ध में घसीटने की है कोई बड़ी चाल

राजनीतिक विश्लेषकों और आलोचकों का मानना है कि इजरायल इस तरह की सनसनीखेज और डरावनी खुफिया जानकारियां साझा करके अमेरिका को ईरान के खिलाफ और अधिक आक्रामक तथा कड़े सैन्य कदम उठाने के लिए मजबूर करना चाहता है। यही वजह है कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के रास्तों को खुला रखने वाले अमेरिकी अधिकारी अब हर कदम बहुत ही फूंक-फूंक कर रख रहे हैं, ताकि किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया को समय से पहले पटरी से उतरने से बचाया जा सके।

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