सो रहे पोलर बियर को फॉगहॉर्न से जगाना पड़ा भारी, व्यक्ति पर लगा 4.5 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना

सो रहे पोलर बियर को फॉगहॉर्न से जगाना पड़ा भारी, व्यक्ति पर लगा 4.5 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना

प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। नॉर्वे के दूर-दराज और बर्फीले इलाके स्वालबार्ड में एक व्यक्ति को सो रहे पोलर बियर (ध्रुवीय भालू) को परेशान करना बेहद महंगा पड़ गया। जहाज के फॉगहॉर्न (तेज आवाज करने वाला हॉर्न) की मदद से आराम कर रहे भालू को नींद से जगाने पर स्थानीय प्रशासन ने कड़ा एक्शन लेते हुए उस पर 50,000 नॉर्वेजियन क्रोनर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 4.5 से 5 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया है। वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर नॉर्वे के कानून कितने सख्त हैं, यह घटना इसकी एक बड़ी मिसाल बन गई है।

जहाज के हॉर्न की तेज आवाज से चौंककर भागा पोलर बियर

यह पूरी घटना इसी महीने की शुरुआत में स्वालबार्ड के एक दूरदराज तट और फ्योर्ड (समुद्री खाड़ी) के पास घटी। जब एक जहाज इस इलाके से गुजर रहा था, तो उसमें सवार लोगों की नजर किनारे पर चैन से सो रहे एक पोलर बियर पर पड़ी। जानवर को नजदीक से देखने और उसमें हरकत पैदा करने की उत्सुकता में जहाज पर सवार एक व्यक्ति ने कथित तौर पर जान-बूझकर नाव का तेज फॉगहॉर्न बजा दिया। फॉगहॉर्न की कान के पर्दे फाड़ देने वाली तेज आवाज से सो रहा भालू अचानक बुरी तरह चौंक गया, हड़बड़ाकर उठा और वहां से भागने पर मजबूर हो गया।

स्थानीय प्रशासन ने की तुरंत कार्रवाई और जारी की चेतावनी

इस संवेदनहीन हरकत की जानकारी जैसे ही स्थानीय अधिकारियों को मिली, स्वालबार्ड के गवर्नर लार्स फॉज ने मामले पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। गवर्नर कार्यालय की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया कि जब जहाज जानवर के पास से गुजर रहा था, तो उसमें सवार एक शख्स ने फॉगहॉर्न बजाकर सो रहे वन्यजीव को अनावश्यक रूप से परेशान किया।

सख्त पर्यावरण नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने याद दिलाया कि स्वालबार्ड पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत ध्रुवीय भालुओं का पीछा करना, उन्हें बिना वजह परेशान करना या उनके प्राकृतिक आवास में खलल डालना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। इस नियम का उल्लंघन करने वाले दोषी व्यक्ति ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और जुर्माना भरने पर सहमति जताई। हालांकि प्रशासन ने आरोपी की पहचान और राष्ट्रीयता उजागर नहीं की है, लेकिन पर्यटकों और टूर ऑपरेटर्स को कड़ी चेतावनी दी गई है कि साल 1972 से स्वालबार्ड में पोलर बियर एक पूरी तरह संरक्षित प्रजाति हैं और उनके शांत जीवन में दखल देने पर गंभीर वित्तीय व कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।

 

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