होर्मुज पर फिर मंडराया मौत का साया: अमेरिका ने ओमान को दी बम गिराने की धमकी, सुलग उठा खाड़ी देशों का समंदर

होर्मुज पर फिर मंडराया मौत का साया: अमेरिका ने ओमान को दी बम गिराने की धमकी, सुलग उठा खाड़ी देशों का समंदर

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सामरिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से एक बार फिर सनसनीखेज और दहला देने वाली खबरें सामने आ रही हैं। इस व्यस्त जलमार्ग पर जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों ने ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी सप्लाई चेन की सांसे अटका दी हैं। इन सबके बीच अमेरिकी प्रशासन और ओमान के बीच तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब अमेरिका की ओर से कथित तौर पर ओमान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया गया और बम गिराने तक की धमकियां सामने आने लगीं। पश्चिम एशिया के इस सुलगते रणक्षेत्र में तेल के कुओं और समुद्री जहाजों पर मंडराते खतरे के बीच दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष एक बड़े विश्व युद्ध की आग को हवा देने वाला है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर लगातार हमले और ग्लोबल ट्रेड का संकट

दुनिया का कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा बनाता है। पिछले कुछ समय से इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों, ऑयल टैंकरों और कार्गो शिप्स पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। इन हमलों के पीछे सक्रिय मिलिशिया समूहों और क्षेत्रीय ताकतों का हाथ बताया जा रहा है, जिससे इस रास्ते से गुजरने वाले नाविकों और शिपिंग कंपनियों में भारी खौफ पैदा हो गया है। जहाजों पर बढ़ते इन खतरों के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।

अमेरिका और ओमान के बीच बढ़ता तनाव और धमकी का पूरा सच

इस संवेदनशील माहौल के बीच ओमान की रणनीतिक स्थिति और उसकी तटस्थ विदेश नीति पर अमेरिकी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ओमान हमेशा से खाड़ी देशों के बीच एक शांतिप्रिय और मध्यस्थ देश की भूमिका निभाता आया है, लेकिन अमेरिकी रक्षा रणनीतिकारों और शीर्ष अधिकारियों के साथ उसके रिश्तों में खटास की खबरें आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंधों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ओमान के बीच तीखी तनातनी हुई है, जिसके चलते अमेरिका की तरफ से आक्रामक तेवर अपनाए गए हैं।

तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता हुआ बड़ा खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी इस घमासान का सीधा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ रहा है। यदि यह जलमार्ग लंबे समय के लिए बंद होता है या यहां जहाजों का आवागमन असुरक्षित हो जाता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो सकती है। भारत समेत कई एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी खाड़ी मार्ग पर निर्भर हैं। तेल के दामों में होने वाली जरा सी भी वृद्धि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई का पहाड़ लेकर आती है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ता है।

खाड़ी देशों की कूटनीति और पश्चिम एशिया का बदलता हुआ खतरनाक समीकरण

पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक समीकरण इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका अपनी नौसैनिक ताकत के दम पर इस क्षेत्र में दबदबा बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय देश अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति से समझौता करने को तैयार नहीं हैं। ओमान जैसे देशों पर बनने वाला दबाव इस बात का संकेत है कि महाशक्तियां अपने सामरिक हितों के लिए छोटे और मध्यस्थ देशों को भी अपने पाले में लाने या उन पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए किस हद तक जा सकती हैं।

आने वाले समय में युद्ध के बादल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी यह तनाव जल्द ही कूटनीतिक बातचीत के जरिए नहीं सुलझाया गया, तो यह संघर्ष पश्चिम एशिया की सीमाओं को पार कर वैश्विक तबाही का रूप ले सकता है। यूनाइटेड नेशंस और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने और समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। दुनिया भर के देश इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं एक छोटी सी चिंगारी पूरे समंदर को आग के गोले में न बदल दे, जिससे मानवता को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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