मलबे में तड़प रहे थे लोग, सेल्फी ले रहे थे अधिकारी! वेनेजुएला भूकंप के बाद आई संवेदनहीनता की शर्मनाक तस्वीरें

मलबे में तड़प रहे थे लोग, सेल्फी ले रहे थे अधिकारी! वेनेजुएला भूकंप के बाद आई संवेदनहीनता की शर्मनाक तस्वीरें

विनाशकारी भूकंप: मातम के बीच प्रशासनिक संवेदनहीनता वेनेजुएला इन दिनों 7.2 और 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के कारण भीषण त्रासदी झेल रहा है। ला गुआइरा राज्य इस आपदा का केंद्र बना हुआ है, जहां मलबे के नीचे दबे शवों की दुर्गंध ने पूरे इलाके को नरक बना दिया है। अब तक 1,430 मौतें और 3,200 घायलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 50,000 लोग अभी भी लापता हैं। लेकिन सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जहां हजारों परिवार अपने प्रियजनों को खोकर बिलख रहे हैं, वहां राहत कार्य के लिए पहुंचे सरकारी कर्मचारी आपदा का 'लुत्फ' उठाते नजर आए। ध्वस्त इमारतों के सामने खड़े होकर अधिकारियों द्वारा ली जा रही सेल्फी ने पूरी दुनिया में वेनेजुएला सरकार के खिलाफ आक्रोश पैदा कर दिया है।

राहत कार्यों में ढिलाई और 'पास' का नया ड्रामा संकट के इस दौर में सरकार की ओर से जो सहायता मिलनी चाहिए थी, उसके बजाय प्रशासन ने बाधाएं खड़ी कर दी हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। स्वयंसेवकों, जो अपने स्तर पर लोगों की जान बचाने के लिए मलबे हटा रहे थे, उन्हें भी 'सुरक्षित प्रवेश पास' लेने के लिए मजबूर किया गया है। स्थानीय लोगों का गुस्सा तब सातवें आसमान पर पहुंच गया जब उन्होंने अधिकारियों को मदद छोड़कर तस्वीरें खिंचवाने में व्यस्त देखा। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन न केवल मदद करने में विफल रहा, बल्कि बचाव कार्य में जुटने वालों के लिए भी मुश्किलें पैदा कर रहा है।

सड़ती लाशें और अपनों की तलाश में जुड़ा हर हाथ भीषण गर्मी के कारण मलबे में दबे शवों के तेजी से सड़ने से स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी बढ़ गया है। ला गुआइरा में हालात इतने भयावह हैं कि लोग मास्क पहनने को मजबूर हैं। दिल दहला देने वाली कहानियों के बीच, पीड़ितों का दर्द साफ झलकता है कि उन्होंने अपने परिजनों को खुद मलबे से बाहर निकाला है, जबकि सरकारी मदद नदारद रही। कैराबलेडा में अपनों को तलाश रही माइलेडी रोमेरो जैसी कई मांएं हैं जिनकी आंखों में आंसू और जुबां पर एक ही सवाल है—"कल रात तक मलबे के नीचे से लोगों की चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं, लेकिन प्रशासन ने बचाने की कोशिश तक नहीं की। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं?" फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 21 देशों की राहत टीमें जुटी हुई हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की उदासीनता इस आपदा को और भी दर्दनाक बना रही है।

 

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