ट्रंप की क्रिप्टो डिप्लोमेसी में पाकिस्तान का 'मास्टरस्ट्रोक': शरीफ और मुनीर की जोड़ी ने ऐसे बनाई व्हाइट हाउस में पैठ

ट्रंप की क्रिप्टो डिप्लोमेसी में पाकिस्तान का 'मास्टरस्ट्रोक': शरीफ और मुनीर की जोड़ी ने ऐसे बनाई व्हाइट हाउस में पैठ

वैश्विक राजनीति के गलियारों में पाकिस्तान का एक नया और बेहद शातिराना दांव सामने आया है। खबर है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की जोड़ी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लुभाने और वाशिंगटन की सत्ता में सीधी पहुंच बनाने के लिए एक 'क्रिप्टो कार्ड' का इस्तेमाल किया। विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों डॉलर के वादे के साथ किया गया यह क्रिप्टो समझौता असल में आर्थिक कम और कूटनीतिक ज्यादा था, जिसने पाकिस्तान को ट्रंप प्रशासन के बेहद करीब ला खड़ा किया है।

क्रिप्टो डील बनी 'एक्सेस' का जरिया मामला ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' (WLF) से जुड़ा है। इसी साल जनवरी में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने कंपनी की सहयोगी फर्म 'SC फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज' के साथ एक एमओयू (MoU) साइन किया था। इसका मकसद सीमा पार भुगतान के लिए 'USD1 स्टेबलक्वाइन' का उपयोग करना था। समझौते के समय शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर और ट्रंप के करीबी सहयोगी जैक विटकाफ की मौजूदगी ने सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि, 6 महीने बीत जाने के बाद भी न तो कोई प्रोजेक्ट शुरू हुआ और न ही लेनदेन हुआ, लेकिन पाकिस्तान का असली मकसद पूरा हो गया।

राजनीतिक लाभ और ट्रंप का 'स्पेशल गेस्ट' बना पाकिस्तान जानकारों का दावा है कि इस क्रिप्टो डील ने पाकिस्तान के लिए कूटनीति के बंद दरवाजे खोल दिए। समझौते के बाद से ही दोनों देशों के बीच नजदीकी बढ़ी है। पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने जैसा बड़ा कदम उठाया। जवाब में, जून 2025 में ट्रंप ने व्हाइट हाउस में सेना प्रमुख आसिम मुनीर को विशेष लंच पर आमंत्रित किया—यह एक दुर्लभ सम्मान था। इतना ही नहीं, ईरान-इजरायल संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता और हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा मुनीर की सार्वजनिक प्रशंसा इसी 'क्रिप्टो कूटनीति' का परिणाम मानी जा रही है।

'पे फार एक्सेस': कागजों में क्रिप्टो, असल में पावर प्ले अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह पूरा प्रयास "पे फार एक्सेस" (Pay-for-Access) रणनीति का हिस्सा था। ट्रंप की क्रिप्टो कंपनियों से जुड़ी कमाई के आंकड़े भी चर्चा में हैं, जहाँ उनके परिवार ने पिछले साल क्रिप्टो टोकन के जरिए भारी मुनाफा कमाया है। पाकिस्तान ने इसी 'बिजनेस-कूटनीति' को भांपते हुए ट्रंप प्रशासन के करीब पहुंचने का रास्ता निकाला। भले ही क्रिप्टो प्रोजेक्ट फिलहाल ठंडे बस्ते में हो, लेकिन पाकिस्तान के लिए यह 'सॉफ्ट पावर' का सबसे सफल प्रयोग साबित हुआ है, जिसने उसे फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।

 

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