ईरान के साथ सैन्य टकराव ने उजागर की अमेरिकी रक्षा भंडारों की हकीकत: जानें अब तक कितनी मिसाइलें हुईं खर्च और नया स्टॉक तैयार होने में लगेंगे कितने साल
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान और उसके सहयोगी गुटों के साथ लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालात ने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के सैन्य रक्षा तंत्र पर गहरा दबाव बना दिया है। सतह से देखने पर अमेरिकी सेना बेहद आधुनिक और अजेय नजर आती है, लेकिन हालिया सैन्य अभियानों में मिसाइलों के भारी इस्तेमाल ने पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मुख्यालय) की एक बड़ी कमजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान के साथ यह टकराव लंबे समय तक चलता है, तो अमेरिका के सामने उन्नत मिसाइलों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की भारी किल्लत खड़ी हो जाएगी। आइए जानते हैं कि इस संघर्ष में अब तक कितनी मिसाइलें दागी जा चुकी हैं और अमेरिका को अपने भंडारों को फिर से भरने में कितना समय लगेगा।
ईरानी हमलों को रोकने में खर्च हुईं अरबों डॉलर की कीमती मिसाइलें
लाल सागर (Red Sea) में हूती विद्रोहियों के ड्रोन व मिसाइल हमलों से जहाजों की सुरक्षा करने और ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को नाकाम करने के लिए अमेरिकी नौसेना और वायुसेना को भारी मात्रा में अपने उन्नत हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने पैट्रियट (Patriot) एयर डिफेंस सिस्टम, एसएम-2 (SM-2), एसएम-3 (SM-3) और एसएम-6 (SM-6) जैसी बेहद कीमती इंटरसेप्टर मिसाइलों को दागा है। एक-एक एसएम-3 मिसाइल की कीमत लगभग 9 से 12 मिलियन डॉलर (करीब 75 से 100 करोड़ रुपये) होती है।
कुछ ही महीनों के भीतर अमेरिका ने अपने उस वार्षिक मिसाइल स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है, जिसे बनाने में सालों का समय लगा था। इसके अलावा, ईरान समर्थित ठिकानों पर सटीक हमले (प्रिसीजन स्ट्राइक) करने के लिए टॉमहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलों और गाइडेड बमों का भी अत्यधिक प्रयोग किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर मिसाइलों की खपत ने अमेरिकी रक्षा थिंक-टैंकों की नींद उड़ा दी है।
कितनी मिसाइलें बची हैं और क्यों खाली हो रहा है अमेरिकी भंडार?
यद्यपि पेंटागन सुरक्षा कारणों से अपने सटीक मिसाइल भंडारों (शस्त्रागार) के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की रक्षा समितियों की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि अमेरिका का 'क्रिटिकल म्यूनिशन स्टॉक' (महत्वपूर्ण हथियारों का भंडार) खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अमेरिका पिछले कुछ सालों से एक साथ कई मोर्चों पर हथियारों की आपूर्ति कर रहा है।
यूक्रेन-रूस युद्ध में यूक्रेन की मदद, ताइवान को सैन्य सहायता और अब मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष के कारण अमेरिकी रक्षा भंडार पर तिहरा दबाव पड़ा है। विशेष रूप से एसएम-3 और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का बचा हुआ स्टॉक अब इतना सीमित हो गया है कि यदि एशिया-प्रशांत क्षेत्र (उदा. चीन के खिलाफ) में कोई नया युद्ध छिड़ता है, तो अमेरिका के लिए एक साथ दो बड़े मोर्चों को संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
नया मिसाइल स्टॉक तैयार करने में आखिर कितने साल लगेंगे?
अमेरिकी सेना के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय उनका सुस्त 'डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस' (रक्षा उत्पादन ढांचा) है। शीत युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका ने अपने रक्षा कारखानों की संख्या कम कर दी थी। आधुनिक मिसाइलें बेहद जटिल होती हैं, जिनमें उच्च तकनीक वाले सेमीकंडक्टर्स, विशेष रॉकेट मोटर्स और दुर्लभ रसायनों की आवश्यकता होती है।
सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि जितने बड़े पैमाने पर मिसाइलें दागी गई हैं, उनकी भरपाई करने और शस्त्रागार को युद्ध-पूर्व वाले स्तर पर लाने में अमेरिका को कम से कम 3 से 5 साल का लंबा समय लगेगा। वर्तमान में लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन जैसी प्रमुख अमेरिकी रक्षा कंपनियां प्रति वर्ष केवल कुछ सौ पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलों का ही उत्पादन कर पाती हैं। रक्षा उत्पादन की इस धीमी गति ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद, लंबे समय तक चलने वाले भीषण युद्ध में अमेरिका के पास हथियारों की तत्काल आपूर्ति करने की क्षमता सीमित है।