'बलूचिस्तान की शेरनी' पर गिरी गाज: लापता अपनों के लिए लड़ने वाली डॉ. महरंग बलोच को उम्रकैद, पाकिस्तान में बढ़ा सियासी उबाल

'बलूचिस्तान की शेरनी' पर गिरी गाज: लापता अपनों के लिए लड़ने वाली डॉ. महरंग बलोच को उम्रकैद, पाकिस्तान में बढ़ा सियासी उबाल

कौन हैं डॉ. महरंग बलोच और क्यों बनीं 'बलूचिस्तान की शेरनी'? बलूचिस्तान की आवाज बनकर उभरीं डॉ. महरंग बलोच को पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 33 वर्षीय महरंग का संघर्ष तब शुरू हुआ था, जब वे महज 16 साल की थीं और उनके पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव लापता हो गए थे। बाद में उनके पिता का शव बरामद हुआ, जो प्रताड़ना के गहरे निशान लिए हुए था। इस घटना ने एक साधारण डॉक्टर को बलूचिस्तान के सबसे बड़े मानवाधिकार आंदोलन का चेहरा बना दिया। उन्हें अब 'बलूचिस्तान की शेरनी' के नाम से जाना जाता है, जो जबरन गायब किए गए (Enforced Disappearances) हजारों लोगों के हक के लिए आवाज उठाती रही हैं।

उम्रकैद के पीछे का विवाद: क्या है आरोप? अदालत ने महरंग और उनके सहयोगी सिबगतुल्लाह शाह को 2024 में ग्वादर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक पैरामिलिट्री सैनिक की मौत के मामले में दोषी ठहराया है। उन पर आतंकवाद, देशद्रोह और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, महरंग का परिवार और उनके समर्थक इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि यह बलूचिस्तान में असहमति की आवाज को दबाने और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने की एक सोची-समझी साजिश है। महरंग की कानूनी टीम ने घोषणा की है कि वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

लापता लोगों का दर्द और पाकिस्तान का 'सौतेला' रुख बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रांत है, लेकिन लंबे समय से उपेक्षा और हिंसा का दंश झेल रहा है। मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि पिछले दो दशकों में हजारों बलूच लोग सुरक्षा बलों द्वारा बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में ले लिए गए। सरकार इन दावों को खारिज करती है और लापता लोगों को उग्रवादी गुटों से जोड़ने की कोशिश करती है। बलूच कार्यकर्ताओं का मानना है कि 'जबरन गायब करना' इस्लामाबाद की वह रणनीति है, जिसका उद्देश्य विद्रोह को कुचलना और स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग को कमजोर करना है।

अदम्य साहस: धमकियों और पाबंदियों के बावजूद जारी संघर्ष महरंग बलोच का एक्टिविज्म केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2023 के अंत में सैकड़ों महिलाओं के साथ 1,600 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा (Long March) का नेतृत्व किया ताकि लापता लोगों के ठिकाने का पता चल सके। जान से मारने की धमकियों और बार-बार गिरफ्तारी के बावजूद वे पीछे नहीं हटीं। मार्च 2025 में क्वेटा में विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी गिरफ्तारी हुई थी। अब उम्रकैद की यह सजा उनके दशकों पुराने संघर्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। महरंग का परिवार और मानवाधिकार संगठन इस मुकदमे को निष्पक्ष मानने से इनकार कर रहे हैं और इसे असहमति को कुचलने का माध्यम बता रहे हैं।

 

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