अंतिम विदाई: 126 दिनों तक कैसे सुरक्षित रखा गया खामेनेई का शव? ईरान ने शुरू किया भव्य शक्ति प्रदर्शन

अंतिम विदाई: 126 दिनों तक कैसे सुरक्षित रखा गया खामेनेई का शव? ईरान ने शुरू किया भव्य शक्ति प्रदर्शन

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई का ऐतिहासिक कार्यक्रम शुक्रवार, 3 जुलाई से शुरू हो गया है। करीब चार महीने के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुए इस राजकीय शोक को ईरान केवल श्रद्धांजलि के रूप में नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक और राजनीतिक एकजुटता के एक विशाल 'शक्ति प्रदर्शन' के तौर पर पेश कर रहा है। तेहरान की ग्रैंड मोसाला मस्जिद में खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के ताबूत रखे गए हैं, जिन्हें देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ रही है। 9 जुलाई तक चलने वाले इस महा-समारोह में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान है।

126 दिनों तक शव को ऐसे रखा सुरक्षित सबसे बड़ा सवाल यह है कि 126 दिनों तक खामेनेई के पार्थिव शरीर को कैसे संरक्षित रखा गया? रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लाम में शव को रासायनिक पदार्थों (केमिकल प्रिजर्वेशन) से सुरक्षित करने की अनुमति नहीं है। ऐसे में ईरानी विशेषज्ञों ने फोरेंसिक मोर्चरी के रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज का सहारा लिया। शिया परंपरा के अनुसार, युद्ध या असाधारण परिस्थितियों में शव को दफनाने में देरी होने पर कम तापमान में सुरक्षित रखने की धार्मिक अनुमति ली गई थी, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी गरिमा के साथ संपन्न हो सके।

अंतिम यात्रा का पूरा कार्यक्रम: तेहरान से मशहद तक खामेनेई की अंतिम विदाई का सफर बेहद लंबा और धार्मिक महत्व वाला है। 4-5 जुलाई को तेहरान की ग्रैंड मोसाला मस्जिद में अंतिम दर्शन होंगे। 6-7 जुलाई को यह यात्रा कोम (Qom) पहुँचेगी, जहाँ उन्होंने शिक्षा प्राप्त की थी। 8 जुलाई को शव को इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा, जो शिया मुसलमानों के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। अंततः, 9 जुलाई को पार्थिव शरीर वापस ईरान लाया जाएगा और मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

ईरान का बड़ा रणनीतिक संदेश विश्लेषकों का मानना है कि इस अंतिम संस्कार के माध्यम से ईरान अमेरिका और इजरायल को यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद देश की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह स्थिर और एकजुट है। समारोह में 30 से अधिक देशों के नेता और 90 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे देश में हाई अलर्ट है, ताकि पहले हुई दुर्घटनाओं जैसी स्थिति न बने। इस आयोजन को ईरान अपनी कूटनीतिक मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देख रहा है।

 

 

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