हर हफ्ते 1.27 करोड़ छापने वाला मानव तस्करी का 'किंग' ब्रिटेन में गिरफ्तार: फर्जी पहचान लेकर मांग रहा शरण
ब्रिटेन की शरणार्थी प्रणाली और सुरक्षा जांच पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फ्रांस की अदालतों से मानव तस्करी के मामले में पांच साल की सजा काट चुका कुख्यात इराकी सरगना ट्वाना जमाल अब ब्रिटेन की धरती पर सुरक्षित पनाहगाह तलाशता पाया गया है। लीसेस्टरशायर के छोटे से ब्लैबी गांव में छिपकर रह रहा यह अपराधी फर्जी पहचान और दस्तावेजों के दम पर शरण के फैसले का इंतजार कर रहा था, जबकि उसका अतीत बेहद खौफनाक रहा है।
'पाशा' बनकर चलाता था तस्करी का साम्राज्य
बीबीसी की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, ट्वाना जमाल उत्तरी फ्रांस के प्रवासी शिविरों से अपना तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था। उसे स्थानीय स्तर पर 'पाशा' (बॉस) के नाम से जाना जाता था। जमाल का नेटवर्क इतना संगठित था कि वह ब्रिटेन जाने वाले हर प्रवासी से औसतन 4500 पाउंड वसूलता था। वह प्रवासियों को प्याज और पनीर से लदे ट्रकों में छिपाकर सीमा पार कराता था। ट्रकों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड डिटेक्टरों को चकमा देने में मदद करती थी, जिससे उसका धंधा बिना किसी रुकावट के चलता रहा। इस अवैध कारोबार से वह हर हफ्ते करीब 1 लाख पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 1.27 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा था।
ब्रिटेन के नियमों को दी खुली चुनौती
हैरानी की बात यह है कि फ्रांस में पांच साल की जेल काट चुका जमाल ब्रिटेन में घुसने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया का फायदा उठा रहा है। ब्रिटेन के मौजूदा आव्रजन नियमों के अनुसार, विदेश में एक साल से अधिक की सजा काट चुके व्यक्ति का शरण आवेदन स्वतः खारिज हो जाना चाहिए, लेकिन जमाल का आवेदन अभी भी पेंडिंग है। ब्लैबी गांव में रहने के दौरान वह न केवल फर्जी नाम का इस्तेमाल कर रहा था, बल्कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी भी चला रहा था। एक सीक्रेट रिकॉर्डिंग में उसने शेखी बघारते हुए कहा था, "यह शहर हमारा है, यहां हमें कोई हाथ नहीं लगा सकता।"
क्या है दूसरा तस्कर 'करदो जाफ' का कनेक्शन?
इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक और बड़ा खुलासा हुआ। करदो जाफ नामक एक अन्य तस्कर भी ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आया है। खुद को 'करदो रान्या' बताने वाला यह शख्स अफगानिस्तान से ब्रिटेन तक फैले अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का सरगना माना जाता है। सीक्रेट बातचीत में जाफ ने दावा किया कि उसके पास ब्रिटेन भेजने के लिए ट्रक, विमान और नाव तक उपलब्ध हैं। उसका यह नेटवर्क इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र से संचालित होता है, जो वर्तमान में मानव तस्करी के सक्रिय अड्डों में से एक बन चुका है।
सरकार की सफाई और बढ़ती चिंता
इन खुलासों के बाद ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (Home Office) ने सफाई दी है कि सभी शरण चाहने वालों की कड़ाई से सुरक्षा और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की जाती है। हालांकि, जमाल और जाफ जैसे अपराधियों की मौजूदगी ने ब्रिटिश सरकार की सुरक्षा नीतियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या अवैध घुसपैठियों के लिए ब्रिटेन एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है? फिलहाल, इन तस्करों के खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी जांच तेज कर दी है।