1.8 अरब डॉलर के 'एंटी वेपनाइजेशन' फंड पर जज ने लगाई अनिश्चितकालीन रोक
अमेरिकी न्यायपालिका और व्हाइट हाउस के बीच एक बार फिर बड़ा कानूनी टकराव देखने को मिल रहा है। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले 1.8 अरब डॉलर (लगभग 1.776 अरब डॉलर) के 'एंटी वेपनाइजेशन' फंड पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने ट्रंप प्रशासन को कड़ा रुख दिखाते हुए महज एक हफ्ते का समय दिया है, ताकि वे शपथ-पत्र (Affidavit) दाखिल कर यह सुनिश्चित करें कि इस फंड को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस फैसले के बाद अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। डिजिटल डेस्क की विशेष कानूनी और भू-राजनीतिक संवाददाता गरिमा सिंह की इस एक्सक्लूसिव और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) कस्टमाइज्ड रिपोर्ट में समझिए इस पूरे विवाद की असली वजह क्या है।
जज लियोनी ब्रिंकेमा का कड़ा आदेश, अस्थायी रोक को बदला अनिश्चितकालीन पाबंदी में
वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के लिए अमेरिकी जिला अदालत की जज लियोनी ब्रिंकेमा ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई करते हुए फंड पर रोक लगाने का शुरुआती आदेश जारी किया था। आपको बता दें कि जज ब्रिंकेमा ने पिछले हफ्ते ही इस भारी-भरकम फंड के इस्तेमाल पर एक अंतरिम या अस्थायी रोक लगाई थी, जिसकी कानूनी मियाद शुक्रवार को समाप्त हो रही थी। लेकिन शुक्रवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इस रोक को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, जिससे ट्रंप प्रशासन की इस योजना को बड़ा कानूनी झटका लगा है।
आईआरएस (IRS) के खिलाफ 10 अरब डॉलर के मुकदमे और जस्टिस डिपार्टमेंट के समझौते की पूरी इनसाइड स्टोरी
यह विवादित फंड दरअसल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी न्याय विभाग (Justice Department) के बीच हुए एक गोपनीय सेटलमेंट यानी समझौते के बाद अस्तित्व में आया था। यह समझौता इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) के खिलाफ राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दायर किए गए 10 अरब डॉलर के भारी-भरकम दीवानी मुकदमे को वापस लेने के एवज में हुआ था। समझौते के तहत जस्टिस डिपार्टमेंट ने विशेष रूप से 1.776 अरब डॉलर (जो अमेरिकी स्वतंत्रता के वर्ष 1776 का एक प्रतीकात्मक नंबर भी है) का एक बड़ा फंड तैयार किया था, जिसकी प्रशासनिक देखरेख की जिम्मेदारी पांच सदस्यों वाले एक विशेष आयोग को सौंपी गई थी।
क्या है 'लाफेयर' और 'वेपनाइजेशन', जिसके पीड़ितों को अरबों डॉलर बांटने की थी तैयारी
इस फंड को बनाने का मुख्य उद्देश्य उन लोगों या संस्थाओं को वित्तीय मुआवजा और सहायता देना था, जो कानूनी तौर पर यह साबित कर सकें कि वे 'लाफेयर' (यानी राजनीतिक लाभ के लिए कानूनी दांव-पेच का इस्तेमाल) और 'वेपनाइजेशन' (यानी कानून और सरकारी जांच एजेंसियों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की नीति) के शिकार हुए हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रूढ़िवादी सहयोगी अपने खिलाफ चल रही विभिन्न आपराधिक जांचों, महाभियोग और अदालती मुकदमों के लिए लगातार इन्हीं 'लाफेयर' और 'वेपनाइजेशन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते आए हैं। आलोचकों का आरोप है कि इस फंड का इस्तेमाल ट्रंप अपने समर्थकों और करीबियों को फायदा पहुंचाने के लिए कर रहे थे, जिस पर अब अमेरिकी अदालत ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है।